
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अपील की है कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए बिजली जैसे बुनियादी और रणनीतिक क्षेत्र को सार्वजनिक क्षेत्र में ही बनाए रखने तथा बिजली के क्षेत्र में चल रही निजीकरण की सभी प्रक्रियाओं पर तत्काल रोक लगाने की स्पष्ट घोषणा आगामी आगामी एक फरवरी को रखे जाने वाले आम बजट में की जाय। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली सार्वजनिक क्षेत्र में रहेगी तभी बनेगा विकसित भारत 2047।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया प्रदेश के सबसे गरीब, ग्रामीण, किसान और निम्न-मध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं के हितों के विरुद्ध है। इन क्षेत्रों में निजीकरण से बिजली दरों में भारी वृद्धि, सब्सिडी समाप्त होने और आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है। अतः पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाय।

