कोलकाता में हटाया गया लियोनेल मेसी का 70 फीट ऊंचा स्टैच्यू, तेज हवाओं के बाद सुरक्षा पर उठे थे सवाल

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कोलकाता। फुटबॉल सुपरस्टार Lionel Messi का पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थापित 70 फीट ऊंचा स्टैच्यू सोमवार को प्रशासन ने हटा दिया। हाल में आए तेज तूफान और खराब मौसम के दौरान स्टैच्यू के हिलने की शिकायतें मिलने के बाद सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया।

लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से स्टैच्यू को उसके आधार से अलग किया। इसके बाद उसे सावधानीपूर्वक ट्रक पर लादकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। अधिकारियों के मुताबिक हटाने की प्रक्रिया के दौरान मूर्ति को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा।

कुछ दिनों पहले लेक टाउन इलाके के स्थानीय निवासियों ने शिकायत की थी कि तेज हवा और खराब मौसम के दौरान मेसी की विशाल प्रतिमा डगमगाने लगती है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस और पीडब्ल्यूडी ने संयुक्त रूप से इसकी तकनीकी जांच कराई।

जांच में ठेकेदार ने बताया कि प्रतिमा की नींव में लगे फाउंडेशन बोल्ट्स में तकनीकी खराबी पाई गई है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि तेज हवा के दौरान यह संरचना असुरक्षित हो सकती है। इसके बाद प्रशासन ने एहतियातन स्टैच्यू हटाने का निर्णय लिया।

10 करोड़ रुपये की लागत से बनी थी प्रतिमा, मेसी ने किया था अनावरण

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेसी की यह प्रतिमा लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई थी। लोहे और फाइबर से निर्मित इस विशाल संरचना को महज 40 दिनों में बनाया गया था।

यह स्टैच्यू पिछले वर्ष दिसंबर में स्थापित किया गया था और तब इसे फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक बड़े आकर्षण के रूप में देखा गया था।

13 दिसंबर 2025 को भारत दौरे पर आए लियोनेल मेसी ने कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रिमोट कंट्रोल के जरिए अपनी प्रतिमा का अनावरण किया था। इस दौरान उनके साथ उरुग्वे के स्टार फुटबॉलर लुईस सुआरेज और अर्जेंटीना के मिडफील्डर रोड्रिगो दि पॉल भी मौजूद थे।

मेसी करीब 14 साल बाद भारत आए थे। हालांकि स्टेडियम में उनका कार्यक्रम बेहद संक्षिप्त रहा, जिससे कुछ प्रशंसक निराश हो गए थे। कार्यक्रम के बाद कुछ स्थानों पर हंगामे और अव्यवस्था की खबरें भी सामने आई थीं।

नई जगह पर स्थापित करने की तैयारी, परियोजना से जुड़े मंत्री की गिरफ्तारी भी चर्चा में

फिलहाल प्रतिमा को पीडब्ल्यूडी की निगरानी में सुरक्षित रखा गया है। राज्य सरकार ने अभी इसके नए स्थान को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। हालांकि चर्चाएं हैं कि भविष्य में इसे कोलकाता के प्रसिद्ध रबिंद्र सरोबार या ईको पार्क में स्थापित किया जा सकता है।

गौरतलब है कि इस परियोजना की शुरुआत पश्चिम बंगाल सरकार के पूर्व मंत्री सुजीत बोस के कार्यकाल में हुई थी। हाल ही में उन्हें नगर निकाय भर्ती घोटाले से जुड़े एक मामले में जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार किया है, जिसके बाद यह परियोजना भी चर्चा में आ गई है।

फिलहाल प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद ही प्रतिमा को दोबारा सार्वजनिक स्थान पर स्थापित किया जाएगा।

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