लेंस डेस्क। केरल हाई कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मामले में राज्य सरकार को सलाह दी है कि हिंदू मंदिरों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक विशेष कानून बनाया जाए, जैसे ‘केरल राज्य देवस्वोम संपत्ति संरक्षण और संरक्षण अधिनियम’, जिसमें दंडात्मक प्रावधान शामिल हों।
अदालत ने मौजूदा देवस्वोम मैनुअल और आंतरिक दिशानिर्देशों को अपर्याप्त बताया, क्योंकि ये केवल अनुशासनिक कार्रवाई की अनुमति देते हैं, न कि अपराध के रूप में। न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन ने मंदिर संपत्तियों के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता जताई और ट्रावनकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) की आलोचना की, जो मुख्य आरोपी उन्निकृष्णन पोट्टी को मंदिर की संपत्तियों तक पहुंच देने में लापरवाही बरतने का आरोप झेल रहा है।
अदालत ने तीन आरोपियों कर्नाटक के ज्वेलर रोडम पांडुरंगैया नागा गोवर्धन, पूर्व टीडीबी अध्यक्ष ए. पद्मकुमार और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बी. मुरारी बाबू की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
क्या है मामला ?
यह मामला 2019 से जुड़ा है, जब सबरीमाला के भगवान अयप्पा मंदिर में गोल्ड-प्लेटेड तांबे की संरचनाओं, जैसे द्वारपालक मूर्तियां और श्रीकोविल के दरवाजों के फ्रेम, की मरम्मत के नाम पर सोने की चोरी हुई। मूल रूप से 1998 में उद्योगपति विजय माल्या द्वारा दान किए गए लगभग 32 किलोग्राम सोने का उपयोग इन संरचनाओं को गोल्ड प्लेटिंग के लिए किया गया था, जिनकी कीमत करीब 18 करोड़ रुपये थी।
2019 में इन पैनलों को मरम्मत के लिए मंदिर से बाहर ले जाया गया और वापस लौटाए जाने पर कोई तत्काल शिकायत नहीं हुई। लेकिन अक्टूबर 2025 में टीडीबी की विजिलेंस जांच में वजन में कमी और लैब टेस्ट में सोने की मात्रा कम पाई गई, जिससे हाई कोर्ट ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया।
एसआईटी की जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी उन्निकृष्णन पोट्टी, जो मंदिर की मरम्मत कार्यों को स्पॉन्सर कर रहा था, ने गोल्ड-प्लेटेड पैनलों को चेन्नई के पास एक मेटल प्रोसेसिंग यूनिट में भेजा, जहां रासायनिक प्रक्रिया से सोना अलग किया गया। जांच में पोट्टी के बेंगलुरु आवास से 176 ग्राम सोना और कर्नाटक के बल्लारी में एक ज्वेलर से 400 ग्राम सोना बरामद हुआ।
कुल मिलाकर 576 ग्राम सोना जब्त किया गया है, लेकिन चोरी की कुल मात्रा करीब 4 किलोग्राम बताई जा रही है। एसआईटी का दावा है कि पोट्टी ने असली पैनलों की जगह बदले या नकली पैनल लौटाए। इस मामले में दो एफआईआर दर्ज हैं – एक द्वारपालक मूर्तियों से चोरी की और दूसरी मंदिर के दरवाजे की गोल्ड प्लेटिंग में अनियमितताओं की।
जब कहानी में आया मोड़
Sabarimala temple gold theft case: इस मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब एसआईटी ने 10 जनवरी 2026 को मंदिर के वरिष्ठ तंत्रि (मुख्य पुरोहित) कंदरारु राजीवरु को गिरफ्तार किया। थझमोन मदोम परिवार से ताल्लुक रखने वाले राजीवरु, जो पीढ़ियों से सबरीमाला के अनुष्ठानों का नेतृत्व करते हैं, पर आरोप है कि उन्होंने पोट्टी को मंदिर में सहायक के रूप में काम करने की अनुमति दी और 2019 में गोल्ड-प्लेटेड प्लेटों की मरम्मत के लिए ‘मौन सहमति’ दी, जो रीति-रिवाजों का उल्लंघन था।
जांच में पोट्टी के बयानों से राजीवरु के लिंक्स सामने आए, जिसमें पोट्टी को तंत्रि के एसोसिएट के रूप में मंदिर आने की बात शामिल है। राजीवरु को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है। एसआईटी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई हैं, क्योंकि उन्हें देवस्वोम बोर्ड से मानदेय मिलता है, जिससे वे लोकसेवक माने जाते हैं।
इसके अलावा, एसआईटी ने कई अन्य गिरफ्तारियां की हैं, जैसे चेन्नई के फैक्ट्री मालिक, बल्लारी के ज्वेलर, पूर्व टीडीबी अधिकारी मुरारी बाबू, कार्यकारी अधिकारी सुधीश कुमार, पवित्र आभूषण आयुक्त केएस बैजू और पूर्व टीडीबी अध्यक्ष एन वासु (सीपीएम नेता)।
वासु पर 2019 में गोल्ड-प्लेटेड शीट को इलेक्ट्रोप्लेटिंग के लिए चेन्नई भेजने की अनुमति देने और दस्तावेजों में इसे तांबे के रूप में दर्ज करने का आरोप है। हाई कोर्ट ने टीडीबी से पूछा है कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी एक व्यक्ति (पोट्टी) को क्यों सौंपी गई और एसआईटी से अस्पताल में भर्ती टीडीबी सदस्य केपी शंकरदास की गिरफ्तारी न करने पर नाराजगी जताई।
केरल के परिवहन मंत्री केबी गणेश कुमार ने हाल ही में तिरुवनंतपुरम में एक प्रदर्शन के दौरान कहा कि पोट्टी को मंदिर में प्रवेश की अनुमति तंत्रि ने दी थी, न कि किसी मंत्री या टीडीबी सदस्य ने। उ
न्होंने एसआईटी की जांच का हवाला देते हुए कांग्रेस के आरोपों का खंडन किया। यह बयान राजनीतिक बहस को और गर्म कर रहा है, जहां विपक्ष एलडीएफ सरकार पर लापरवाही का आरोप लगा रहा है। जांच अभी जारी है और भक्तों में विश्वास की कमी का मुद्दा उठ रहा है, लेकिन राजनीतिक जिम्मेदारी पर सवाल बने हुए हैं।

