संसार को चलाने वाला भगवान है उसके बगैर सहमति के पत्ता भी नहीं डोलता तो घमंड किस बात की-भुपेन्द्र पांडे

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नगर पंचायत पाटन में कलश यात्रा के साथ पहले दिन की गोकर्ण कथा प्रारम्भ

पाटन। नगर पंचायत पाटन में वर्मा परिवार द्वारा आयोजित कथा के पहले दिन में इंदिरा नगर पाटन से कलश यात्रा के साथ प्रारम्भ हुआ । कलश यात्रा इंदिरा नगर पाटन होते हुए अखरा के शीतला तालाब में पुजा अर्चना करते हुए वापस कथा पंडाल स्थल में पहुंचा ।कथा के प्रथम दिवस गुणडरदेही के कथा वाचक पंडित भुपेन्द्र पांडेय ने गोकर्ण की कथा सुनाते हुए कहा कि ज्ञानी ब्राह्मण आत्मदेव को एक संन्यासी से एक फल मिलता है, जिसे वे अपनी पत्नी धुन्धुली को दे देते हैं। धुन्धुली फल अपनी गाय को खिला देती है और उसकी बहन से एक पुत्र लेती है, जिसका नाम धुन्धकारी रखा जाता है। धुन्धकारी दुराचारी और पापी होता है, जबकि गाय के गर्भ से जन्मा गोकर्ण, ज्ञानी और धर्मनिष्ठ बनता है। आत्मदेव और धुन्धुली को एक संन्यासी एक फल देते हैं,।मनुष्य नाई के ऊपर इतना विश्वास करता एक बार उस कन्हाई के ऊपर कर ले जीवन बदल जायेगा।

लेकिन धुन्धुली उस फल को अपनी गाय को खिला देती है। गाय के गर्भ से उत्पन्न होने के कारण, उस बालक के कान गाय के कान जैसे होते हैं, इसलिए उसका नाम गोकर्ण रखा जाता है। धुन्धुली अपनी बहन से एक पुत्र लेती है, जिसका नाम धुन्धकारी रखा जाता है, जो बाद में बहुत पापी निकलता है। धुन्धकारी बड़ा होकर अत्यंत दुष्ट, अत्याचारी और दुराचारी बनता है, जो अपने पिता की सारी संपत्ति नष्ट कर देता है और अपनी माँ को भी मार डालता है।धुन्धकारी की मृत्यु के बाद, उसके पापों के कारण उसकी आत्मा प्रेत योनि में भटकने लगती है। गोकर्ण, अपने भाई धुन्धकारी को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए, श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करते हैं ।मृत्यु अटल सत्य है और संसार को चलाने वाला भगवान है उसके बगैर सहमति के पत्ता भी नहीं डोलता तो घमंड किस बात का करते है आप और हम यह समझ से परे है ।भागवत कथा के सातवें दिन, धुन्धकारी की प्रेत योनि से मुक्ति हो जाती है और वह भगवान के धाम चला जाता है, क्योंकि उसने कथा को एकाग्र चित्त से सुना था पहली बार कथा सुनकर धुन्धकारी को मुक्ति मिलती है। जब गोकर्ण दूसरी बार कथा सुनाते हैं, तो भगवान स्वयं प्रकट होते हैं और उस गाँव के सभी जीवों (कुत्ते, चण्डाल आदि) को भी मुक्ति प्रदान करते हैं, क्योंकि उन्होंने भी कथा ध्यान से सुनी थी। इस कथा में प्रमुख रुप से पिन्टु वर्मा पुष्कर वर्मा चन्दुलाल वर्मा नंदकुमार वर्मा ईश्वरीय वर्मा बलराम वर्मा योगिता वर्मा बदरा बाई बिन्दु बाई मनीषा वर्मा दुर्गा वर्मा पुजा वर्मा भुनेश्वरी खोमेन्द्र विनय मेघु टिकेन्द्र नाथ गंगादीन साहु सहित इंदिरा नगर पाटन के मुहल्लावासी उपस्थित थे ।



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