वेनेजुएला सैन्य कार्रवाई का अमेरिका में ही विरोध, UN ने बुलाई आपात बैठक, ममदानी ने बताया सत्ता परिवर्तन की कोशिश

NFA@0298
5 Min Read


लेंस डेस्‍क। वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले के विरोध में अमेरिका में ही आवाज उठनी शुरू हो गई हैं। इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सोमवार सुबह 10 बजे आपात बैठक करेगा। वहीं न्यूयॉर्क शहर के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी ने हमले की कड़ी आलोचना की है।

इस हमले का भारत में भी विरोध हो रहा है। विशाखापत्तनम में कम्युनिस्टों और ट्रेड यूनियन ने रैली निकाल कर अमेरिका की सैन्‍य कार्रवाई का विरोध किया।

वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम को लेकर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत सरकार ने कहा है कि वह वहां की तेजी से बदलती स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

भारत ने वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और कल्याण के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए सभी संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे आपसी मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से संवाद के माध्यम से सुलझाएं। भारत का कहना है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना सभी के हित में है।

इस बीच, वेनेजुएला की राजधानी काराकास स्थित भारतीय दूतावास वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लगातार संपर्क में है। दूतावास ने भरोसा दिलाया है कि भारतीय समुदाय को हर संभव सहायता प्रदान की जाती रहेगी और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह वेनेजुएला में शांति, स्थिरता और जनता के हितों के पक्ष में खड़ा है।

अमेरिका ने किया है हवाई हमला

अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास सहित उत्तरी इलाकों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका फिलहाल वेनेजुएला को ‘चलाएगा’ और इसके विशाल तेल भंडार का उपयोग करेगा, जब तक सुरक्षित संक्रमण नहीं हो जाता। इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कई देशों ने कड़ी निंदा की है।

हमलों में कम से कम 40 लोग मारे गए, जिनमें नागरिक और सैन्यकर्मी शामिल हैं। वेनेजुएला सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर इसे ‘साम्राज्यवादी आक्रमण’ करार दिया।

उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने मादुरो की तत्काल रिहाई की मांग की है। कोलंबिया, रूस और चीन के समर्थन से यह बैठक बुलाई गई है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे ‘खतरनाक मिसाल’ बताया, जबकि ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने इसे ‘अस्वीकार्य’ करार दिया। रूस और चीन ने भी अमेरिकी कार्रवाई को संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताया।

अमेरिका में भी इस पर विभाजन दिखा। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने इसे “युद्ध की कार्रवाई और संघीय व अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया। उन्होंने इसे स्पष्ट सत्ता परिवर्तन की कोशिश करार देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप से सीधे बात की और विरोध दर्ज कराया।

ममदानी ने चिंता जताई कि यह न्यूयॉर्क में रहने वाले हजारों वेनेजुएलाई प्रवासियों को सीधे प्रभावित करेगा।

न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर पर सैकड़ों प्रदर्शनकारी जमा हुए, जो ‘वेनेजुएला से हाथ हटाओ’ और ‘तेल के लिए खून नहीं’ जैसे नारे लगा रहे थे।

कुछ जगहों पर मादुरो विरोधी प्रदर्शन भी हुए, लेकिन मुख्य रूप से विरोध अमेरिकी हस्तक्षेप के खिलाफ था।

ट्रंप प्रशासन ने ऑपरेशन को ड्रग तस्करी के खिलाफ कार्रवाई बताया, लेकिन आलोचक इसे तेल संसाधनों पर कब्जे की कोशिश मान रहे हैं। मादुरो दंपति पर न्यूयॉर्क में नार्को-टेररिज्म के आरोप लगे हैं और सोमवार को अदालत में पेशी संभावित है।

यह घटना लैटिन अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेप की पुरानी यादें ताजा कर रही है, जबकि वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।





Source link

Share This Article
Leave a Comment