मसौदा मतदाता सूची में जिन्‍हें मृत बताया, TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने उन्‍हें मंच पर खड़ा कर दिया, चुनाव आयोग को देनी पड़ी सफाई

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लेंस डेस्‍क। Abhishek Banerjee Rally : पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी ने बारुईपुर में शुक्रवार को एक रैली के दौरान चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।

अभिषेक बनर्जी ने मंच पर तीन ऐसे मतदाताओं को बुलाया, जिन्हें मसौदा मतदाता सूची में मृत दिखाया गया है, जबकि वे जीवित हैं। इनमें मेटियाबुरुज के मनीरुल मोल्ला और माया दास, साथ ही काकद्वीप के हरेकृष्ण गिरी शामिल हैं।

अभिषेक ने इसे चुनाव आयोग की साजिश बताते हुए कहा कि यह बंगाल के लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि दक्षिण 24 परगना जिले में ही ऐसे 24 मामले हैं, जहां जीवित लोगों को मृत घोषित किया गया।

आनंद बाजार पत्रिका की खबर के अनुसार इस पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा कि मसौदा सूची अंतिम नहीं है और इसमें त्रुटियां सुधारने का अवसर है। आयोग के अनुसार, अब तक राज्य में 12-15 ऐसी शिकायतें आई हैं, जहां जीवित लोगों को मृत दिखाया गया। हर मामले की जांच हो रही है और अगर जानबूझकर गलती पाई गई तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 भरकर नए नाम जोड़े जा सकते हैं और सभी जानकारी उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

राज्य में विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान कई बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) की मौत की घटनाएं भी चर्चा में हैं। अब तक पांच बीएलओ की मौत हो चुकी है, जिनमें से कुछ ने कथित तौर पर आत्महत्या की। परिवारों का आरोप है कि काम के दबाव के कारण ऐसा हुआ। उदाहरण के तौर पर, पूर्व बर्धमान की नमिता हांसदा ब्रेन स्ट्रोक से मर गईं, जलपाईगुड़ी के शांतिमुनि ओरांव ने आत्महत्या की, नदिया के रिंकू तरफदार ने सुसाइड नोट छोड़ा, मुरशिदाबाद के जाकिर हुसैन की हृदय रोग से मौत हुई, और हाल ही में बांकुड़ा के हराधन मंडल ने आत्महत्या की। चुनाव आयोग ने इन मामलों पर रिपोर्ट मांगी है, लेकिन अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।

इसके अलावा, पूर्व वामपंथी मंत्री क्रांति गंगोपाध्याय को सुनवाई के लिए तलब किया गया, जिस पर सवाल उठे। आयोग ने कहा कि अगर कोई शिकायत है तो जांच होगी। साथ ही, मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोप में चार अधिकारियों और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें बारुईपुर पूर्व के अधिकारी देवोत्तम दत्त चौधुरी, तथागत मंडल, और मयना विधानसभा के विप्लब सरकार, सुदीप्त दास शामिल हैं।

अभिषेक बनर्जी ने केंद्र और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया, जबकि विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि अंतिम सूची में रोहिंग्या और घुसपैठियों के नाम नहीं होंगे। टीएमसी ने दावा किया कि 2021 से ज्यादा सीटें जीतेंगी, जबकि भाजपा ने 220 सीटों का लक्ष्य रखा है।



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