प्रधानमंत्री मोदी ने सीसीएस की बैठक में आम लोगों की जरूरतों की समीक्षा की

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नयी दिल्ली, 1 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के प्रभाव से भारतीय नागरिकों की रक्षा के लिए ‘हर संभव प्रयास’ करने का बुधवार को आह्वान किया और गलत सूचना एवं अफवाहों को रोकने के लिए प्रामाणिक जानकारी का सुचारु प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की एक विशेष बैठक में संघर्ष के मद्देनजर उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई और आम लोगों की महत्वपूर्ण जरूरतों की उपलब्धता का आकलन किया गया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक बयान के अनुसार, बैठक में मोदी ने संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करने का आह्वान किया।

यह बैठक मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा करने और पश्चिम एशिया संघर्ष के संदर्भ में आगे की पहल पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई।

इस मुद्दे पर सीसीएस की यह दूसरी विशेष बैठक थी। पहली बैठक 22 मार्च को हुई थी।

बयान में कहा गया है कि मोदी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे मौजूदा वैश्विक स्थिति से प्रभावित नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए हर संभव उपाय करें।

प्रधानमंत्री ने उर्वरकों की स्थिति और खरीफ एवं रबी मौसम में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की। उन्होंने गलत सूचना और अफवाहों को रोकने के लिए जनता तक प्रामाणिक जानकारी का सुचारु प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सीसीएस की बैठक की अध्यक्षता की। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की और आगे उठाए जाने वाले कदमों पर भी चर्चा की।’’

उन्होंने कहा कि बैठक में ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, जहाजरानी और रसद जैसे कुछ क्षेत्रों पर चर्चा हुई।

कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन ने पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से एलएनजी, एलपीजी, और बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी।

विभिन्न देशों से नई आवक के साथ एलपीजी की खरीद के लिए स्रोतों में विविधता लाई जा रही है।

तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) भी विभिन्न देशों से प्राप्त की जा रही है।

कैबिनेट सचिव ने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें अपरिवर्तित हैं और इसकी जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए नियमित रूप से अवैध बिक्री रोकने के अभियान चलाए जा रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी बैठक में उपस्थित थे।

ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी, नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी इस बैठक में उपस्थित थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और प्रधानमंत्री के दो प्रधान सचिव पी के मिश्रा और शक्तिकांत दास भी उपस्थित थे।

बैठक में जानकारी दी गई कि पाइपलाइन के माध्यम से प्राकृतिक गैस कनेक्शन का विस्तार करने के लिए पहल की गई है। गर्मी के महीनों के दौरान बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 7-8 गीगावॉट क्षमता वाले गैस आधारित बिजली संयंत्रों को गैस पूलिंग तंत्र से छूट देना और ताप विद्युत संयंत्रों पर अधिक कोयले की आपूर्ति के लिए रेक बढ़ाना जैसे उपाय भी किए गए हैं।

बैठक में बताया गया कि उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यूरिया उत्पादन को आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए रखने, डीएपी/एनपीकेएस आपूर्तिकर्ताओं के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।

बयान में कहा गया है कि राज्य सरकारों से आग्रह किया गया है कि वे दैनिक निगरानी, ​​छापेमारी और सख्त कार्रवाई के माध्यम से उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और हेराफेरी पर अंकुश लगाएं। (भाषा)



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