रायपुर। छत्तीसगढ़ के खरसिया थाना में पुलिस कस्टडी में मारपीट (Police Custodial Death) के बाद रमेश चौहान की मौत के मामले में कई घंटे तक चला तनाव दो पुलिस कर्मियों के लाइन अटैच के साथ शांत हो गया।
NH-49 पर ग्रामीणों ने जब चक्काजाम शुरू किया तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कर्मियों पर एफआईआर की मांग की गई थी। लेकिन कई घंटों तक चले विवाद के बाद विधायक उमेश पटेल की मध्यस्थता के बाद लाइन अटैच के साथ ही समाप्त कर दिया गया।
प्रशासन और आक्रोशित ग्रामीणों के बीच हुई बातचीत के बाद फिलहाल मामला शांत हो गया है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में अब तक किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं हुई है, जबकि दो आरक्षकों को लाइन अटैच किया गया है।
बताया जा रहा है कि परासकोल निवासी रमेश चौहान को पुलिस पूछताछ के लिए हिरासत में लेकर आई थी। इसी दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।
मेडिकल रिपोर्ट में सिर में ब्रेन हेमरेज की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाते हुए NH-49 बोतल्दा पर चक्काजाम कर दिया था।
घटना की जानकारी मिलने के बाद विधायक उमेश पटेल मौके पर पहुंचे और प्रशासन तथा ग्रामीणों के बीच बातचीत कराई। लंबी चर्चा के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ, जिसके बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया और यातायात बहाल हो गया।
मामले में फिलहाल विभागीय कार्रवाई करते हुए दो आरक्षकों को लाइन अटैच किया गया है। हालांकि इस मामले में अब तक किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है।
समझौते के तहत प्रशासन ने मृतक की पत्नी को कलेक्टर दर पर नौकरी देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की भी घोषणा की गई है।
प्रशासन ने ग्रामीणों से पांच लोगों के नाम देने को कहा है, जो जांच प्रक्रिया में अपनी बात रख सकेंगे।
फिलहाल समझौते के बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो गई है, लेकिन कस्टडी में मौत के मामले को लेकर लोगों के बीच कई सवाल भी उठ रहे हैं।
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