पश्चिम एशिया संघर्ष के 14वें दिन टकराव बढ़ा,खाड़ी से लेबनान तक जंग तेज

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  • तेल-गैस ठिकानों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा खतरा

इस्तांबुल/वॉशिंगटन/ तेहरान/ बेरूत। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव लगातार खतरनाक होता जा रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है और इसके प्रभाव पूरे क्षेत्र में फैलते दिखाई दे रहे हैं। समुद्र में नौसैनिक टकराव, मिसाइल-ड्रोन हमले, लेबनान में हिजबुल्लाह की सक्रियता और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते खतरे ने इस युद्ध को एक बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल दिया है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने मिसाइल और ड्रोन हमले में अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन (सीवीएन-72) को निशाना बनाया और उसे नुकसान पहुंचाया। आईआरजीसी के मुताबिक क्षेत्र में चल रहे सैन्य अभियानों के दौरान इस हमले को अंजाम दिया गया। हालांकि अमेरिका ने अभी तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है और नुकसान या हताहतों को लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसी बीच समुद्र में एक और तनावपूर्ण घटना सामने आई है। 

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार एक ईरानी जहाज अमेरिकी विमानवाहक पोत के काफी करीब पहुंच गया था। इसके बाद अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत से नौसैनिक तोप से फायरिंग की गई। शुरूआती गोलीबारी निशाने पर नहीं लग सकी, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हेलफायर मिसाइलों से लैस सैन्य हेलीकॉप्टर भेजा गया। हेलीकॉप्टर ने ईरानी जहाज की ओर दो मिसाइलें दागीं। हालांकि इस घटना में जहाज को हुए नुकसान या चालक दल की स्थिति के बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

युद्ध के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चेतावनियां सामने आई हैं। आईआरजीसी ने स्पष्ट कहा है कि यदि ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे या बंदरगाहों पर हमला किया गया तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस भंडार को आग के हवाले कर देगा। इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि ईरान इस जलमार्ग को बंद नहीं करेगा, जबकि देश के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर इसे दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा मार्ग है, इसलिए इसकी सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

संघर्ष का दायरा अब लेबनान तक फैल चुका है। ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह भी इस जंग में सक्रिय हो गया है, जिससे इजराइल को दो मोर्चों पर लड़ाई का सामना करना पड़ रहा है। इजराइल ने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इसके जवाब में हिजबुल्लाह ने भी रॉकेट दागे। लेबनान के अधिकारियों के अनुसार बेरूत के दक्षिण में स्थित एक विश्वविद्यालय पर इजरायली हवाई हमले में दो शिक्षाविदों की मौत हो गई।

इसी बीच अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान एक और घटना सामने आई है। अमेरिकी वायुसेना का केसी-135 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट पश्चिमी इराक में लापता हो गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि यह घटना ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान फ्रेंडली एयरस्पेस में हुई। विमान में पांच सदस्य सवार थे और उनकी तलाश के लिए बचाव अभियान जारी है। दूसरा रिफ्यूलिंग विमान सुरक्षित उतार लिया गया है।

युद्ध के प्रभाव अमेरिका के भीतर भी महसूस किए जा रहे हैं। मिशिगन के वेस्ट ब्लूमफील्ड स्थित टेंपल इजराइल आराधनालय में एक हमले की घटना सामने आई, जिसमें एक संदिग्ध की गोली लगने से मौत हो गई। बताया गया कि वह राइफल लेकर परिसर में घुसने की कोशिश कर रहा था। ट्रक में विस्फोटक जैसी सामग्री भी पाई गई। घटना में कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।इन घटनाओं ने संकेत दे दिया है कि पश्चिम एशिया का यह संघर्ष अब सीमित सैन्य कार्रवाई से आगे बढ़ चुका है।

समुद्री मार्गों की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, लेबनान में खुला नया मोर्चा और अमेरिका तक पहुंची सुरक्षा चिंताओं ने इसे व्यापक भू-राजनीतिक संकट में बदल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह टकराव पूरे क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।



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