पत्रकारिता की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर मंथन, पत्रकारों ने लिया निष्पक्षता का संकल्प

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कौशाम्बी। जिले में हिन्दी पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को जिला मुख्यालय मंझनपुर स्थित सरस सभागार में भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनपद के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल एवं सोशल मीडिया से जुड़े सैकड़ों पत्रकारों ने सहभागिता करते हुए हिन्दी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास, वर्तमान चुनौतियों तथा लोकतंत्र में मीडिया की जिम्मेदारियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में पत्रकारिता की निष्पक्षता, विश्वसनीयता एवं सामाजिक दायित्वों को बनाए रखने का सामूहिक संकल्प भी लिया गया।संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार रामबदन भार्गव ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ पत्रकार सुशील केसरवानी ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास और राष्ट्र निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा के साथ हुई।अध्यक्षीय संबोधन में रामबदन भार्गव ने कहा कि 30 मई 1826 को पंडित युगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित देश के प्रथम हिन्दी समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ से हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत हुई थी। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में प्रतिवर्ष हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना तक हिन्दी पत्रकारिता ने समाज को जागरूक करने और जनमत तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होना भारतीय मीडिया जगत के लिए गर्व के साथ-साथ आत्ममंथन का भी अवसर है। समय के साथ तकनीक और माध्यम भले बदल गए हों, लेकिन पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य, निष्पक्षता और जनहित की रक्षा करना ही है। उन्होंने समाज में बढ़ती वैमनस्यता को समाप्त कर सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने पर भी बल दिया।वरिष्ठ पत्रकार रमेश चन्द्र अकेला ने कहा कि पत्रकारिता केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का माध्यम है। पत्रकारों को हर परिस्थिति में नैतिक मूल्यों और निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।पत्रकार अशोक केसरवानी ने कहा कि सूचना क्रांति के दौर में पत्रकारिता का स्वरूप व्यापक हुआ है। पहले जहां पत्रकारिता केवल समाचार पत्रों तक सीमित थी, वहीं आज डिजिटल और सोशल मीडिया ने इसे नई दिशा दी है। उन्होंने युवा पत्रकारों से वरिष्ठों के अनुभवों का सम्मान करने और पत्रकारिता की मूल परंपराओं को बनाए रखने का आह्वान किया।पत्रकार अशोक विश्वकर्मा ने हिन्दी भाषा की शुद्धता को पत्रकारिता की आत्मा बताते हुए कहा कि पत्रकार की पहचान उसकी भाषा और अभिव्यक्ति से होती है। उन्होंने पत्रकारों से हिन्दी के शुद्ध और प्रभावी प्रयोग पर विशेष ध्यान देने की अपील की।वरिष्ठ पत्रकार सुशील केसरवानी ने कहा कि ग्रामीण एवं क्षेत्रीय स्तर पर कार्य करने वाले पत्रकार ही पत्रकारिता की वास्तविक रीढ़ हैं। यही पत्रकार दूरदराज क्षेत्रों की समस्याओं को प्रशासन और समाज तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। उन्होंने विभिन्न पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों का एक मंच पर एकत्र होना पत्रकार एकता का सकारात्मक संदेश बताया।संगोष्ठी में वक्ताओं ने पत्रकारिता पर हो रहे हमलों, फेक न्यूज की बढ़ती चुनौती, सोशल मीडिया की भूमिका, मीडिया की विश्वसनीयता तथा लोकतंत्र में पत्रकारों की जिम्मेदारी जैसे विषयों पर भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की निष्पक्षता, निर्भीकता और विश्वसनीयता को हर हाल में बनाए रखना आवश्यक है।इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ केसरवानी को माल्यार्पण, अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार रामबदन भार्गव एवं रमेश चन्द्र अकेला को भी अंगवस्त्र, माल्यार्पण और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में अनुराग शुक्ला, रोहित तिवारी, मोहम्मद अलीम, रविन्द्र सिंह, विमलेश शुक्ला, पंकज केसरवानी, नारायण दत्त तिवारी, अली मुक्तजा, धारा सिंह यादव, ओमप्रकाश केशरी, महेंद्र शुक्ला, सच्चिदानंद मिश्रा, शमशाद अली, रवि वैश्य, दिलशाद अहमद, धर्मेंद्र सोनकर, अजय कुमार, पवन मिश्रा, सुबोध केसरवानी, गणेश साहू, अजीत कुशवाहा, विष्णु सोनी, योगेंद्र त्रिपाठी सहित जनपद के सैकड़ों पत्रकार उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में पत्रकारों ने हिन्दी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनहित के मुद्दों को निर्भीकता के साथ उठाने का संकल्प लिया।



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