लेंस इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप के नाम से लिखा गया एक पत्र इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह पत्र व्हाइट हाउस के लेटरहेड पर लिखा बताया जा रहा है, जिसमें ग्रीनलैंड पर ‘पूर्ण और सम्पूर्ण नियंत्रण’ की बात कही गई है।
हालांकि, इस पत्र की अब तक न तो व्हाइट हाउस और न ही ट्रंप की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है। विशेषज्ञ इसे सोशल मीडिया पर वायरल दावा मान रहे हैं।
वायरल हो रहे इस पत्र में ‘प्रेसिडेंट DJT’ के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं।

पत्र की शुरुआत ‘Dear Jonas’ से होती है और इसमें कई विवादास्पद दावे किए गए हैं।
इस पत्र को लेकर नार्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने कहा है कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का एक मैसेज मिला है, जिसमें लिखा गया है कि नोबेल नहीं मिलने से अब उन्हें शांति के बारे में सोचने की जरूरत महसूस नहीं होती।
वायरल पत्र में ट्रंप ने लिखा है कि उन्होंने आठ युद्ध रुकवाए, इसके बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया गया। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा नहीं कर सकता, न रूस से और न ही चीन से।
पत्र में ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के ‘मालिकाना हक’ पर सवाल उठाया है। नाटो (NATO) को लेकर कहा कि ट्रंप ने संगठन के लिए किसी भी अन्य व्यक्ति से ज्यादा काम किया है। पत्र का सबसे विवादित हिस्सा यह है कि ‘दुनिया तब तक सुरक्षित नहीं हो सकती, जब तक अमेरिका के पास ग्रीनलैंड पर पूर्ण और सम्पूर्ण नियंत्रण न हो।’
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के दौरान भी ग्रीनलैंड को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं।
2019 में ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड खरीदने की इच्छा जताने पर डेनमार्क और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। हालांकि, उस समय भी ग्रीनलैंड और डेनमार्क ने साफ किया था कि ग्रीनलैंड ‘बिकाऊ नहीं है।’
विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि यह पत्र व्यक्तिगत भाषा और असामान्य दावों से भरा हुआ है। आधिकारिक अमेरिकी दस्तावेजों की भाषा और प्रक्रिया से यह मेल नहीं खाता। अब तक व्हाइट हाउस, नाटो या ट्रंप के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से इस पत्र का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इसी कारण इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पत्र वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे अमेरिकी विस्तारवाद की सोच से जोड़ रहे हैं। तो कुछ इसे राजनीतिक व्यंग्य या फर्जी डॉक्यूमेंट बता रहे हैं। कई यूजर्स इसकी भाषा को ‘अहंकारी और असंवैधानिक’ भी बता रहे हैं।
यह भी पढ़ें : ट्रंप से मिलीं मारिया कोरिना मचाडो, सौंपा अपना नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल

