
- आवास मामले में भी बरता जा रहा भेदभाव ….. उतई नगर पंचायत ने ही वाटरकोष और कब्जो पर दे दिया प्रधानमंत्री आवास?
उतई,दुर्ग (ग्रामीण) दुर्ग जनपद के पूर्व सदस्य उतई व्यापारी संघ के अध्यक्ष सतीश पारख ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार गरीबों, बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवा महिलाओं के प्रति असंवेदनशील हो चुकी है। प्रदेश भर में सामाजिक सुरक्षा पेंशन, वृद्धा,दिव्यांग और विधवा पेंशन पिछले 7 महीनों से हितग्राहियों को नहीं मिल रहा है। एक तरफ साय सरकार पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार मना रही है, वहीं, दूसरी ओर जरूरतमंदों को महज 500 रु. का पेंशन भी नहीं मिल रहा है । सुशासन तिहार के शिविरों में बड़े-बड़े टेंट, माइक में प्रदेश भर में करोड़ों रूपए फूंके जा रहे हैं, दूसरी ओर निराश्रित और जरूरतमंदों का पैसा रोका गया है ।
सतीश पारख ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करने वालों की उम्र 60 से अधिक की होती है, वहीं उनमें से कई शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीज है। एक तो उन्हें घर से पैसा नहीं मिलता और सामाजिक परिवेश अब कुछ ऐसा बन चुका है कि ज्यादातर परिवारों मे बुजुर्गों को एक उम्र के बाद परिवार के बीच अहमियत नहीं मिल पाती। ऐसी स्थिति में वे अपनी स्वास्थ्यगत सेवाओं के लिए शासन से मिलने वाली छोटी सी ही सही पेंशन सहायता राशि पर ही निर्भर होते हैं। वह भी पिछले पांच/सात माह से उन्हें न मिले तो सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है कि उनकी स्थिति क्या होगी?
दुर्ग जनपद के पूर्व सदस्य व उतई व्यापारी संघ के अध्यक्ष सतीश पारख ने दावा किया कि 500 रु. की छोटी रकम के रूप में मिलने वाली पेंशन को सरकार नहीं दे पा रही है।प्रधानमंत्री आवास मामले में भी अनेक विसंगतियों के चलते जरूरतमंदों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है उतई नगर पंचायत में ही गलत तरीके से लोगों को प्रधानमंत्री आवास दिए जा रहे है । इसके अलावा महतारी वंदन योजना से भी नव विवाहित महिलाओं को भी वंचित किया जा रहा है। के वाय सी अपडेट के नाम पर हजारों महिलाओं का नाम काट दिया गया है। दूसरी ओर योजना का लाभ देने पुन: आवेदन भी नहीं लिए जा रहे हैं। प्रदेश भर में ढाई वर्षों में हजारों विवाह हुए हैं, उन नवविवाहितों को इसका लाभ मिलना चाहिए। लेकिन, सरकार पोर्टल शुरू नहीं कर रही। श्री पारख ने कहा कि सुशासन तिहार के नाम पर गाँव-गाँव में शिविर लगाए जा रहे हैं। जिसमें कहीं-कहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं औचक निरीक्षण के लिए पहुँच रहे हैं। कुछ अधिकारियों कर्मचारियों को मौके पर शिकायत होने पर निलंबन की कार्यवाही भी तत्काल कर रहे है ।किंतु इससे शिकायत कर्ता का समाधान नहीं हो रहा है ऐसी स्थिति में गरीब कमजोर किसान मजदूरों की समस्याओं का समाधान ही नहीं हो रहा है तो सरकार किस बात की सुशासन तिहार मना रही है ? ये सुशासन तिहार नहीं ठगासन तिहार और सरकार की नौटंकी प्रतीत होता है !


