धरती माता बचाओ अभियान: रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग पर सीडीओ ने जताई चिंता

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कौशाम्बी। जिले में बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग को रोकने और मिट्टी की उर्वरक शक्ति को बचाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) विनोद राम त्रिपाठी की अध्यक्षता में ‘धरती माता बचाओ अभियान’ के तहत जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सीडीओ ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब किसानों को जैविक खेती की ओर मोड़ा जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन को बंजर होने से बचाया जा सके।विकास भवन स्थित कार्यालय कक्ष में हुई इस बैठक में सीडीओ ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की भौतिक और रासायनिक गुणवत्ता तेजी से गिर रही है। उन्होंने बताया कि जनपद की मिट्टी में जीवांश कार्बन की निरंतर कमी हो रही है, जिससे महंगे उर्वरकों का उपयोग करने के बावजूद फसलों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। जैविक खाद न केवल सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार करती है।मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद की सभी गौशालाओं को खाद उत्पादन का केंद्र बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने समस्त खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि गौशालाओं में वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) का बड़े पैमाने पर उत्पादन कराया जाए और इसे किसानों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जाए। इससे जहां एक ओर खाद की समस्या दूर होगी, वहीं दूसरी ओर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को इस कार्य से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।किसानों को जागरूक करने की जिम्मेदारी कृषि विभाग के अधिकारियों और वैज्ञानिकों को सौंपी गई है। सीडीओ ने उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार सिंह को निर्देश दिए कि वे किसानों को पशुओं के गोबर, गोमूत्र, फसल अवशेष और पेड़ों की पत्तियों से कम्पोस्ट खाद तैयार करने की विधि सिखाएं। किसानों को जागरूक किया जाएगा कि वे बाजार की रासायनिक खाद के बजाय घरेलू जैविक संसाधनों का उपयोग करें।”मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट और हरी खाद का प्रयोग अनिवार्य है। किसानों को संतुलित उर्वरक प्रयोग के प्रति जागरूक करना हमारी प्राथमिकता है।” — विनोद राम त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी

 



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