
डायबिटीज के मरीज अक्सर यह मान लेते हैं कि जिस चीज में चीनी नहीं है, वह ब्लड शुगर नहीं बढ़ाएगी. इसी सोच के चलते शुगर फ्री बिस्किट को लोग बिना डर के खाने लगते हैं. लेकिन डॉक्टरों के अनुसार “शुगर फ्री” लिखा होना हमेशा हेल्दी होने की गारंटी नहीं देता.
ज्यादातर शुगर फ्री बिस्किट मैदे से बनाए जाते हैं. मैदा एक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट है, जो शरीर में जाकर तेजी से ग्लूकोज में बदलता है और ब्लड शुगर को अचानक बढ़ा सकता है. इसके अलावा इनमें रिफाइंड ऑयल, ट्रांस फैट और आर्टिफिशियल स्वीटनर भी मिलाए जाते हैं, जो लंबे समय में सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
अगर इन बिस्किट का रोजाना और ज्यादा मात्रा में सेवन किया जाए, तो डायबिटीज के मरीजों में शुगर कंट्रोल बिगड़ सकता है. इतना ही नहीं, जो लोग अभी डायबिटिक नहीं हैं, उनमें भी भविष्य में डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है.
कितनी मात्रा सही है और खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान
शुगर फ्री बिस्किट को “फ्री” समझकर ज्यादा खाना सबसे बड़ी गलती है. डॉक्टरों की सलाह है कि दिन में 1–2 बिस्किट से ज्यादा न खाएं और वह भी कभी-कभार. रोज चाय के साथ बिस्किट खाने की आदत से बचना बेहतर है.
बिस्किट खरीदते समय पैकेट का लेबल जरूर पढ़ें. यह देखें कि बिस्किट मैदे की बजाय साबुत गेहूं या मल्टीग्रेन से बना हो, उसमें फाइबर की मात्रा अच्छी हो और माल्टोडेक्सट्रिन जैसे तत्व न हों, क्योंकि ये भी ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं. इस्तेमाल किए गए आर्टिफिशियल स्वीटनर की जानकारी भी जरूरी है.
अगर चाय के साथ कुछ खाने की आदत है, तो बिस्किट की जगह हेल्दी विकल्प चुनें. जैसे रोस्टेड मखाना, मूंगफली, बादाम या काजू (सीमित मात्रा में), चिया सीड्स, अलसी, कद्दू के बीज या ओट्स से बनी चीजें. ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाज डायबिटीज के मरीजों के लिए ज्यादा फायदेमंद माने जाते हैं. अगर बिस्किट खाना ही हो, तो घर पर बने आटे के बिस्किट बेहतर विकल्प हैं, जिनमें आप चीनी और तेल दोनों को कंट्रोल कर सकते हैं.

