रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नए साल की शुरुआत में संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव औरछत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट गुरुवार को राजधानी पहुंचे। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस की दो महत्वपूर्ण बैठकें राजीव भवन में ली और दोनों ही बैठकों में मनरेगा मुद्दा रहा। अगले दो महीने कांग्रेस मनरेगा (MNREGA) को लेकर अभियान चलाएगी।
पहली बैठक पॉलिटिकल अफेयर कमेटी (PAC) की थी और दूसरी जिला कांग्रेस अध्यक्षों की थी। इन बैठकों में संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ बड़े जन आंदोलन की रणनीति तय की गई।
बैठकों का सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि कांग्रेस जनवरी और फरवरी 2026 में प्रदेशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चलाएगी। इसके तहत गांव से लेकर विधानसभा तक चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)के दौरान वंचित पात्र मतदाताओं के नाम जुड़वाने, धान खरीदी में किसानों को हो रही परेशानियों और केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए संशोधनों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सचिन पायलट ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार मनरेगा को कमजोर करने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा, ‘मनरेगा दुनिया का इकलौता कानून था जो रोजगार को संवैधानिक अधिकार देता था। भाजपा ने इसे कानून से योजना में बदल दिया।’
प्रभारी ने कहा कि पहले 15 दिन में काम नहीं मिलने पर भत्ता मिलता था, अब वह अधिकार भी छीना जा रहा है। केंद्र-राज्य का अनुपात 90:10 से बदलकर 60:40 कर दिया गया है। यह सीधे-सीधे गरीब और भूमिहीन मजदूरों पर हमला है।
पायलट ने भरोसा जताया कि जैसे भाजपा को कृषि कानून वापस लेने पड़े, वैसे ही मनरेगा संशोधन भी वापस लेना पड़ेगा।
दोनों बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, एआईसीसी सचिव एवं सह-प्रभारी डॉ. एस.ए. संपत कुमार, जरिता लेतफ्लांग, विजय जांगिड़ सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ नेता और जिला अध्यक्ष उपस्थित रहे।
दीपक बैज बोले – साढ़े 7 लाख लोग पलायन को मजबूर
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मनरेगा को कांग्रेस की विफलता का स्मारक बताया, लेकिन आज उसी योजना का बजट 65% तक घटा दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में मनरेगा के तहत औसतन केवल 28 दिन का काम मिला, जिसके चलते करीब 7.5 लाख लोग रोज़गार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हुए।
कांग्रेस की मांग है कि मनरेगा मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन की जाए और संशोधन वापस लिया जाए।
मजदूरों और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई : डॉ. महंत
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि यह आंदोलन मजदूरों और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई है और इसे निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया जाएगा।
पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि मनरेगा में किए गए बदलावों से होने वाले नुकसान को जनता के बीच तथ्यात्मक रूप से रखा जाएगा।
आंदोलन का पूरा कैलेंडर जारी
बैठक में मनरेगा बचाओ संग्राम का विस्तृत कार्यक्रम तय किया गया। 10 जनवरीको जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी। 11 जनवरीसे एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध होगा।
12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपाल, जनसंपर्क और नुक्कड़ सभाएं होंगी। 30 जनवरी को वार्ड व ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरना होगा। 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला कलेक्टर कार्यालयों पर धरना और ज्ञापन होगा। 7 से 15 फरवरी तक राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव होगा और 16 से 25 फरवरी तक क्षेत्रीय एआईसीसी रैलियां होंगी।
जिला कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि आंदोलन को पूरी गंभीरता और एकजुटता के साथ जमीन पर उतारा जाएगा। सभी जिलों को अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

