छत्तीसगढ़ प्रवासी मजदूर हत्‍या मामले में परिजनों का शव लेने से इनकार, केरल पहुंचा परिवार

NFA@0298
3 Min Read


रायपुर। केरल के वायलर में छत्‍तीसगढ़ के प्रवासी मजदूर की मॉब लिंचिंग में हुई मौत के बाद अब परिवार वालों ने शव लेने से इनकार कर दिया है। रविवार को उसके परिजन केरल पहुंचे थे। उन्होंने मुआवजा मिलने तक शव लेने से मना कर दिया।

मृतक की शिनाख्त 31 साल के रामनारायण बघेल के तौर पर हुई है, जो छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के करही गांव से थे। वह काम की तलाश में कुछ दिन पहले ही केरल आए थे। पोस्टमॉर्टम में उनके शरीर पर 80 से ज्यादा चोटों के निशान मिले, जो हमले की क्रूरता को बयां करते हैं।

बघेल को स्थानीय लोगों के एक समूह ने चोरी के आरोप में और बांग्लादेशी समझकर इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी अस्पताल में मौत हो गई। यह वारदात 17 दिसंबर की बताई जा रही है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में 18 दिसंबर का जिक्र है।

21 दिसंबर को उनके परिजन, जिनमें पत्नी ललिता, बच्चे अनुजा और आकाश के अलावा अन्य रिश्तेदार शामिल थे, त्रिशूर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। शव देखकर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

रामनारायण एक गरीब दलित परिवार से थे और घर के इकलौते कमाने वाले थे। उनके भाई शशिकांत ने सभी दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है। परिवार का कहना है कि वे दलित समुदाय से हैं, लिहाजा एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत केस दर्ज होना चाहिए। उन्होंने 25 लाख रुपये के मुआवजे की भी मांग की और कहा कि मांगें पूरी होने तक वे शव नहीं लेंगे और केरल में ही रुकेंगे। उनका आरोप है कि राज्य सरकार की तरफ से अब तक कोई मदद या संपर्क नहीं किया गया।

केरल कांग्रेस के नेता राजेंद्रन अरंगथ ने भी सरकार पर लापरवाही का इल्जाम लगाया। उन्होंने कहा कि चार दिन बीत जाने के बावजूद मुआवजे का ऐलान नहीं हुआ और पुलिस ने सिर्फ चार-पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि आरोपी करीब 15 हैं। उन्होंने विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने और सभी दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

गया है.



Source link

Share This Article
Leave a Comment