कलश, जौ और चावल क्यों हैं नवरात्रि पूजा

NFA@0298
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Navratri2026: चैत्र नवरात्रि के साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है और इसी दिन से मां दुर्गा की नौ दिनों तक विशेष पूजा की जाती है, जिसमें कलश स्थापना, जौ बोना और अक्षत यानी चावल का प्रयोग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश को मंगल का प्रतीक माना जाता है, जिसमें भरा जल गंगा और क्षीरसागर का रूप होता है, वहीं उसके ऊपर रखा नारियल भगवान शिव का प्रतीक होता है और इसका आधार ब्रह्मा का प्रतिनिधित्व करता है, इस तरह एक कलश में संपूर्ण सृष्टि और सभी देवताओं का वास माना जाता है।

कलश की स्थापना हमेशा घर के उत्तर-पूर्व दिशा में करनी चाहिए और उसमें सुपारी, सिक्का, आम या अशोक के पत्ते रखकर विधिपूर्वक स्थापित करना चाहिए। इसके साथ ही जौ बोने की परंपरा भी बेहद खास है, जिसे सृष्टि की पहली फसल माना जाता है और यह समृद्धि, सुख और अच्छी फसल का संकेत देता है, यदि जौ हरे-भरे और घने उगते हैं तो इसे पूरे साल खुशहाली का संकेत माना जाता है।

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वहीं अक्षत यानी चावल को पूजा में अखंडता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, कलश के नीचे चावल रखने से मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त होती है और घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती। मान्यता है कि इन तीनों चीजों का सही विधि से प्रयोग करने पर पूजा पूर्ण फल देती है, लेकिन अगर इसमें कोई गलती हो जाए तो पूजा का प्रभाव कम हो सकता है, इसलिए नवरात्रि में इनका सही तरीके से उपयोग करना बेहद जरूरी माना गया है।

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