
लखनऊ।उत्तर प्रदेश में निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने नई तैयारी शुरू कर दी है। पिछले वर्ष आरटीई के तहत निर्धारित सीटों के मुकाबले केवल 1.41 लाख बच्चों का नामांकन हुआ था। ऐसे में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में हर विकास खंड में जिला स्तरीय अधिकारियों को प्रवेश कराने का लक्ष्य तय किया जाएगा और उनकी जिम्मेदारी स्पष्ट की जाएगी।
प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में प्रवेश आरटीई के तहत अनिवार्य है। प्रत्येक निजी स्कूल में पूर्व-प्राथमिक और कक्षा एक की कुल क्षमता का 25 प्रतिशत आरटीई के लिए निर्धारित है। इस बार नए सत्र में 68 हजार स्कूलों में लगभग 6.80 लाख सीटें आरटीई के लिए उपलब्ध होंगी। आवेदन प्रक्रिया 2 फरवरी से शुरू होगी।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे उपलब्ध सीटों के आधार पर ज्यादा से ज्यादा बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करें। इसके लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर बीएसए, बीईओ और बाल विकास परियोजना अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
इसके अलावा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांव-गांव प्रचार-प्रसार किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक माता-पिता अपने बच्चों का आवेदन कर सकें। आरटीई में प्रवेश के लिए आवश्यक आय, निवास, जाति और दिव्यांग प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया जिला, तहसील और ब्लॉक स्तर पर सुगम बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अधिक बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए प्रत्येक जिले में आवेदन सहायता केंद्र भी शुरू किए जाएंगे, जहां अभिभावक अपने बच्चों के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार कर सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से प्रदेश में आरटीई के तहत नामांकन बढ़ाने और शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

