ईरान संकट पर अमेरिका-रूस आमने-सामने, ट्रंप के बयान से भड़का वैश्विक तनाव

NFA@0298
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मॉस्को । ईरान में जारी व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच वैश्विक राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने इस संवेदनशील मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय टकराव की ओर धकेल दिया है। ट्रंप ने ईरान में प्रदर्शन कर रहे लोगों को खुले तौर पर समर्थन जताते हुए संकेत दिया कि उन्हें बाहरी सहायता मिल सकती है, जिससे हालात और भड़क गए हैं।ट्रंप के इस रुख पर रूस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका को साफ शब्दों में आगाह किया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या उसकी धमकी न केवल गैर-जिम्मेदाराना होगी, बल्कि इसके परिणाम बेहद विनाशकारी साबित हो सकते हैं। रूस ने इसे ईरान की संप्रभुता में सीधा हस्तक्षेप करार दिया है।

रूस का कहना है कि यदि आंतरिक असंतोष को आधार बनाकर किसी बाहरी शक्ति ने ईरान पर हमला करने की कोशिश की, तो इससे मध्य पूर्व में पहले से मौजूद अस्थिरता और गहराएगी, जिसका असर वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ेगा। मॉस्को ने साफ किया कि ऐसे कदमों को वह किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।उधर, ईरान में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। बीते कई हफ्तों से देश के विभिन्न हिस्सों में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई में अब तक करीब दो हजार लोगों की जान जा चुकी है। हालात पर नियंत्रण के लिए ईरानी सरकार ने इंटरनेट प्रतिबंध, गिरफ्तारी और सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे कठोर कदम उठाए हैं, जिससे मानवाधिकार संगठनों की चिंता बढ़ गई है।

अमेरिका लंबे समय से इन प्रदर्शनों को नैतिक समर्थन देता रहा है और ट्रंप प्रशासन पहले भी संकेत दे चुका है कि ईरान को लेकर उसके पास कूटनीतिक दबाव से लेकर सैन्य विकल्प तक मौजूद हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को सख्त करना, क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ रणनीति बनाना और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग जैसे विकल्प शामिल बताए जा रहे हैं।रूस की चेतावनी और अमेरिका के आक्रामक रुख के बीच यह साफ हो गया है कि ईरान का संकट अब केवल एक देश का आंतरिक मामला नहीं रह गया है। सवाल यह है कि आने वाले दिनों में विश्व शक्तियां बातचीत का रास्ता अपनाएंगी या फिर टकराव मध्य पूर्व को एक नए संकट की ओर ले जाएगा।



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