आत्मज्ञान और भक्ति से मोक्ष मिलती है-विष्णु अरोड़ा

NFA@0298
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पाटन /ग्राम केसरा में चल रही भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह में कथावाचक पूज्य श्री बाल योगी विष्णु अरोड़ा जी महाराज ने शुक्राचार्य आगमन, भीष्म स्तुति, कपिल चरित्र और ध्रुव चरित्र जैसे दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि शुकदेव जी के आगमन से भागवत कथा का शुभारंभ होता है, जिससे ज्ञान और भक्ति की धारा प्रवाहित होती है।

भीष्म स्तुति प्रसंग में महाराज ने पितामह भीष्म के जीवन को धर्म, नीति और भक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि मृत्यु शैया पर भी श्रीकृष्ण का ध्यान कर भीष्म ने यह संदेश दिया कि सच्चा भक्त हर परिस्थिति में ईश्वर को स्मरण रखता है।

कपिल चरित्र के माध्यम से महाराज श्री ने सांख्य योग के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए आत्मज्ञान और भक्ति को मोक्ष का मार्ग बताया। ध्रुव चरित्र के प्रसंग में पांच वर्षीय बालक ध्रुव की अटूट श्रद्धा और संकल्प का वर्णन किया गया, जिसमें बताया गया कि सच्ची लगन और दृढ़ निश्चय से असंभव भी संभव हो जाता है। ध्रुव की भक्ति हर युग में प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उन्होंने आगे कहा सुनीति के मार्ग में चलने से सफलता मिलती है,कथा सुनने दूरस्थ अंचलों से बड़ी संख्या में श्रोता पहुंच रहे है प्रतिदिन कथा 1.30से5बजे तक होती है आज की कथा में आयोजक सहित बड़ी संख्या में स्त्री पुरुष एवम बच्चे उपस्थित रहे।



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