आंध्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर 7 नक्सलियों की मौत, देवजी समेत बड़े कमांडर ढेर, 50 नक्सली गिरफ्तार

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Naxal Encounter: 19 नवंबर की सुबह छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के उस इलाके में मुठभेड़ हुई, जहां कल कुख्यात नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा (हिडमा) को मार गिराया गया था। आंध्र प्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा पर एएसआर (अल्लूरी सीताराम राजू) जिले के निकटवर्ती क्षेत्र में यह ऑपरेशन चल रहा था। सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता मिली है जिसमें 7 नक्सलियों (4 पुरुष और 3 महिलाएं) मारे गए। इनमें माओवादी संगठन के महा सचिव (महासचिव) देवजी (थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी) भी शामिल हैं। आंध्र प्रदेश के इंटेलिजेंस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है।

आज सुबह 6:30 से 7:00 बजे के बीच, आंध्र प्रदेश के एएसआर जिले के मरेडुमिल्ली मंडल में जो छत्तीसगढ़ के सुकमा से सटा हुआ है। यह वही क्षेत्र है जहां हिड़मा एनकाउंटर हुआ था। आंध्र प्रदेश पुलिस की स्पेशल पार्टी टीम, ग्रेहाउंड्स कमांडो, सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टुकड़ी। इंटेलिजेंस इनपुट्स के आधार पर रात से ही कंबिंग ऑपरेशन चल रहा था।

देवजी (थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी): माओवादी पार्टी का महासचिव और सेंट्रल कमेटी मेंबर। हिड़मा के बाद संगठन का सबसे बड़ा बचा हुआ नेता। उसके सिर पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था। वह हिड़मा का करीबी सहयोगी था और कई बड़े हमलों (जैसे 2010 दंतेवाड़ा अटैक) में शामिल रहा।
मेटूरू जोगा राव उर्फ टेक शंकर: सूत्रों के अनुसार, हिड़मा के गार्ड यूनिट का मेंबर। वह साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी से जुड़ा था और हथियारों का विशेषज्ञ माना जाता था।

बरामद हथियार और सामग्री 2 एके-47 राइफलें। कुल 8 हथियार (इनमें एसएलआर, इंसास राइफल, सेल्फ-लोडिंग राइफलें और हैंडमेड ग्रेनेड लांचर शामिल) इसके अलावा विस्फोटक सामग्री, गोलियां, नक्सली साहित्य और दवाइयां भी जब्त की गयी ।

आंध्र प्रदेश पुलिस ने नक्सल संगठन को अभूतपूर्व झटका देते हुए बीते दो दिनों में जगरगुंडा और केरलापाल एरिया कमेटी समेत कई सक्रिय संरचनाओं के प्रमुख कमांडरों की गिरफ्तारी की है, जिसमें जगरगुंडा एरिया कमेटी के प्रमुख लखमा, वर्षों से जमीनी स्तर पर सक्रिय नक्सली मदन्ना उर्फ जग्गु दादा, इलाके में चर्चित एरिया कमांडर सोड़ी मनीला, तीन स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर्स (एसजेडसीएम) सहित कुल 50 नक्सलियों को हिरासत में लिया गया है; यह कार्रवाई हिड़मा और देवजी जैसे शीर्ष नेताओं के खात्मे के बाद माओवादी संगठन की रीढ़ तोड़ने वाली सबसे बड़ी सफलता साबित हुई है, जिससे नक्सलवाद के खिलाफ केंद्रीय अभियान ‘कागर’ को नई गति मिली है।



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