इशारों से शुरू हुई संवाद की परंपरा, आज 7 हजार से ज्यादा भाषाओं का विशाल संसार – लेकिन 40% पर विलुप्ति का खतरा
WORLD NEWS: दुनिया में आज कितनी भाषाएं बोली जाती हैं, यह सवाल जितना सरल दिखता है, उसका इतिहास उतना ही गहरा और रोमांचक है। अंतरराष्ट्रीय भाषा सर्वेक्षण संस्था Ethnologue के अनुसार वर्तमान समय में विश्व में लगभग 7,000 से अधिक भाषाएं प्रचलित हैं। हालांकि यह संख्या स्थिर नहीं है, क्योंकि कुछ भाषाएं समय के साथ विलुप्त हो जाती हैं तो कुछ नई भाषाएं या उपभाषाएं जन्म लेती हैं। भाषा केवल बोलने का माध्यम नहीं, बल्कि मानव सभ्यता, संस्कृति, परंपरा, ज्ञान और पहचान की धरोहर है।
भाषा की शुरुआत कैसे हुई?
मानव इतिहास के प्रारंभिक काल में जब मनुष्य शिकारी-संग्रहकर्ता जीवन जीता था, तब संवाद के लिए इशारों, ध्वनियों और संकेतों का प्रयोग किया जाता था। धीरे-धीरे ये ध्वनियां अर्थपूर्ण शब्दों में बदलीं और शब्द वाक्यों में विकसित हुए। विद्वानों का मानना है कि लगभग 50 हजार से 1 लाख वर्ष पहले आधुनिक मानव (होमो सेपियन्स) ने संरचित भाषा का प्रयोग शुरू किया।
प्राचीन भाषाओं का विकास
सभ्यताओं के विकास के साथ भाषाओं ने भी आकार लिया। मेसोपोटामिया की सुमेरियन भाषा को दुनिया की सबसे प्राचीन लिखित भाषाओं में माना जाता है, जिसका प्रमाण लगभग 3100 ईसा पूर्व मिलता है। इसके बाद मिस्र की हाइरोग्लिफिक, सिंधु घाटी की लिपि, संस्कृत, चीनी, ग्रीक और लैटिन जैसी भाषाओं ने मानव इतिहास को दिशा दी।
संस्कृत को विश्व की सबसे प्राचीन व्यवस्थित और वैज्ञानिक भाषाओं में गिना जाता है। वेदों की रचना इसी भाषा में हुई। दूसरी ओर, लैटिन ने यूरोप की कई आधुनिक भाषाओं—फ्रेंच, स्पेनिश, इटालियन और पुर्तगाली—को जन्म दिया।
भाषा परिवार क्या होते हैं?
दुनिया की भाषाओं को उनके मूल और संरचना के आधार पर अलग-अलग भाषा परिवारों में बांटा गया है। सबसे बड़ा भाषा परिवार इंडो-यूरोपीय है, जिसमें हिंदी, अंग्रेजी, स्पेनिश, रूसी, जर्मन और फारसी जैसी भाषाएं आती हैं। इसके अलावा साइनो-तिब्बती (जिसमें मंदारिन चीनी प्रमुख है), अफ्रो-एशियाटिक (अरबी, हिब्रू), नाइजर-कांगो (अफ्रीकी भाषाएं) और द्रविड़ भाषा परिवार (तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम) प्रमुख हैं।
आज दुनिया में कितनी भाषाएं हैं?
Ethnologue 2025 के अनुसार विश्व में लगभग 7,100 के आसपास भाषाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से कई भाषाएं केवल छोटे समुदायों तक सीमित हैं। पापुआ न्यू गिनी अकेले 800 से अधिक भाषाओं का घर है। इंडोनेशिया, नाइजीरिया और भारत भी भाषाई विविधता के प्रमुख केंद्र हैं। भारत में संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएं मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन देश में सैकड़ों भाषाएं और हजारों बोलियां प्रचलित हैं।
सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाएं
दुनिया में सबसे अधिक मातृभाषी वक्ताओं वाली भाषा मंदारिन चीनी है। इसके बाद स्पेनिश, अंग्रेजी, हिंदी और अरबी का स्थान आता है। अंग्रेजी को वैश्विक संपर्क भाषा (लिंगुआ फ्रांका) का दर्जा प्राप्त है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विज्ञान, तकनीक और कूटनीति में व्यापक रूप से प्रयुक्त होती है।
लुप्त होती भाषाएं – एक गंभीर संकट
विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत भाषाएं विलुप्ति के कगार पर हैं। औसतन हर दो हफ्ते में एक भाषा हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। जब किसी भाषा का अंतिम वक्ता दुनिया से चला जाता है, तो उसके साथ सदियों का ज्ञान, लोककथाएं, परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर भी खत्म हो जाती है।
यूनेस्को ने कई भाषाओं को ‘एंडेंजर्ड’ यानी संकटग्रस्त घोषित किया है। आधुनिकता, शहरीकरण, प्रवास और वैश्वीकरण के कारण छोटी भाषाएं बड़ी भाषाओं में समाहित होती जा रही हैं।
लेखन प्रणालियों का विकास
भाषा के साथ-साथ लिपि का विकास भी महत्वपूर्ण रहा है। चित्रलिपि से शुरू होकर ध्वन्यात्मक लिपियों तक का सफर हजारों साल में पूरा हुआ। देवनागरी, रोमन, अरबी, सिरिलिक, चीनी लिपि और हिब्रू लिपि विश्व की प्रमुख लेखन प्रणालियां हैं। डिजिटल युग में यूनिकोड ने विभिन्न लिपियों को एक वैश्विक मंच पर जोड़ दिया है।
डिजिटल युग और भाषा
इंटरनेट और सोशल मीडिया ने भाषाओं के स्वरूप को बदल दिया है। आज कई लुप्तप्राय भाषाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संरक्षित करने की कोशिश की जा रही है। वहीं इमोजी, शॉर्ट फॉर्म और हिंग्लिश जैसे मिश्रित रूप भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
भारत की भाषाई विरासत
भारत को ‘भाषाओं का महासागर’ कहा जाता है। यहां इंडो-आर्यन, द्रविड़, ऑस्ट्रो-एशियाटिक और तिब्बती-बर्मी परिवार की भाषाएं पाई जाती हैं। संस्कृत से लेकर तमिल तक, हिंदी से लेकर कोंकणी और बोडो तक—यह विविधता भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक है।
भविष्य की भाषाएं
भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अनुवाद तकनीक भाषाई सीमाओं को कम कर सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय भाषाओं का संरक्षण आवश्यक है। भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि पहचान और अस्तित्व का आधार है।
निष्कर्ष
दुनिया में 7,000 से अधिक भाषाएं मानव सभ्यता की अनमोल धरोहर हैं। यह विविधता हमारी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी देती है कि यदि संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां हजारों भाषाओं से वंचित रह जाएंगी। भाषा बचाना केवल शब्दों को बचाना नहीं, बल्कि पूरी सभ्यता और इतिहास को सुरक्षित रखना है।
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