Vedanta Power Plant Accident: आपराधिक लापरवाही का नतीजा

NFA@0298
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छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई में स्थित निजी क्षेत्र के वेदांता पावर प्लांट में एक बॉयलर के फटने से हुई भीषण दुर्घटना आपराधिक लापरवाही का नतीजा है, जिसमें 20 मजदूरों की जान चली गई है और अनेक मजदूर जीवन और मृत्यु से संघर्ष कर रहे हैं। यह हादसा कितना दर्दनाक था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बॉयलर के फटने की आवाज दूर तक सुनी गई और इसकी जद में आने वाले अनेक मजदूर बुरी तरह झुलस गए, जिनमें से कई की शिनाख्त तक मुश्किल हो गई।

इस हादसे ने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानदंडों और निगरानी तंत्र की बदहाली को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है। सक्ती के जिस बिजली संयंत्र में यह हादसा हुआ है, उसे महज तीन साल पहले 2025 में वेदांता ने लिमिटेड ने दिवालियापन और दिवालिया संहिता के प्रावधानों के तहत एथेना समूह से इसे खरीदा था। बताने की जरूरत नहीं कि तब छत्तीसगढ़ पावर प्लांट नामक यह संयंत्र बदहाली में था और बताया तो यह भी जाता है कि यहां कामकाज ठप पड़ा था। यानी यह हादसा एक बदहाल संयंत्र को फिर से शुरू करने के महज दो साल के भीतर हो गया।

प्रधानमंत्री कार्यालय सहित बेशक वेदांता समूह ने हादसे में मारे गए मजदूरों के लिए मुआवजे और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है, लेकिन इस हादसे ने निजी क्षेत्र की बड़ी औद्योगिक इकाइयों की बदइंतजामी और मजदूरों की बेबसी को भी उजागर किया है।

दरअसल इस हादसे से प्रभावित मजदूर सीधे वेदांता के नहीं, बल्कि ठेके पर वहां काम करने वाली एक अन्य एजेंसी के कर्मचारी थे। दूसरी बात जिस पर गौर करने की जरूरत है, वह यह कि महज सालभर पहले ही बॉयलर अधिनियम 2025 अस्तित्व में आया है, जिसने 102 साल पुराने भारतीय बॉयलर अधिनियम की जगह ली है। इस नए अधिनियम का मुख्य मकसद ही बॉयलर में होने वाले हादसों को रोकना है, लेकिन सक्ती में हुआ हादसा बता रहा है कि किस तरह से इस अधिनियम की धज्जियां उड़ाई गई हैं।

दरअसल सांस्थानिक रूप से हमारा इतना क्षरण हो चुका है कि हम ऐसे हादसों के बाद थोड़े समय के लिए नियम कायदों और जवाबदेहियों की बात करते हैं और सब कुछ, किसी अगले हादसे के होने तक, अपने ढर्रे पर चलने लगता है। मसलन, 2017 में जब रायबरेली के ऊंचाहार में स्थिति एनटीपीसी फिरोजगांधी थर्मल पावर प्लांट के बॉयलर फटने से हुए भीषण हादसे में 38 मजदूरों की मौत हो गई थी, उसके सात साल बाद संसद में सरकार की ओर से बिजली अधिनियम 2003 के तहत की गई कार्रवाइयों के ब्योरे दिए गए थे और बताया गया था कि किस तरह से वहां स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम (एसओपी) का पालन करने में लापरवाही बरती गई थी। सक्ती में स्थित वेदांता के पावर प्लांट में हुआ बॉयलर विस्फोट बताता है कि पिछले हादसे से कोई सबक नहीं लिया गया।

निश्चित रूप से इस वक्त पहली चिंता इस हादसे में गंभीर रूप से घायल मजदूरों को बेहतर इलाज मुहैया कराने और मृत मजदूरों के परिजनों को मानवीय और आर्थिक मदद पहुंचाने की है, मगर इसके साथ ही इस हादसे की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। यह सरासर आपराधिक लापरवाही का मामला है, जिसमें जवाबदेह लोगों को किसी भी तरह बख्शा नहीं जाना चाहिए।



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