
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी उथल-पुथल अब और बढ़ गई है। पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाइक ने उच्च सदन से इस्तीफा दे दिया है। साथ ही उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी है। यह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को लगातार तीसरा बड़ा झटका है। सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद प्रकाश चिक बड़ाइक के जाने से टीएमसी की राज्यसभा में संख्या घटकर 10 रह जाएगी। कई मीडिया रिपोर्ट्स कह रहे हैं कि और इस्तीफे हो सकते हैं, अगर ऐसा हुआ तो ममता बनर्जी की पार्टी के लिए संकट और गहरा हो जाएगा।
राज्यसभा के चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन को लिखे अपने इस्तीफे में प्रकाश चिक बड़ाइक ने तत्काल प्रभाव से सदस्यता छोड़ने की बात कही। उन्होंने अपने कार्यकाल में मिले सहयोग के लिए चेयरमैन, उप-चेयरमैन और सचिवालय का आभार जताया। पिछले हफ्ते टीएमसी में बड़ी बगावत हुई थी, जिसमें 80 विधायकों में से 58 ने अलग होकर विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में मान्यता मांगी। इस गुट की अगुवाई पूर्व टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं।अब यह बगावत संसद तक पहुंच गई है। लोकसभा में भी बागी गुट सक्रिय है। काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले इस गुट में कई सांसद शामिल हो चुके हैं।
प्रकाश चिक बड़ाइक कौन हैं?
प्रकाश चिक बड़ाइक पश्चिम बंगाल की अलीपुरद्वार (अनुसूचित जनजाति) सीट से टीएमसी के टिकट पर 2024 लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। वे ग्रेजुएट हैं और अपना करियर चाय बागान में काम करके शुरू किया। बाद में मौसमी फसलों का री-सेलर का काम किया।
चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति ₹24.5 लाख है और उन पर कोई कर्ज नहीं है। सालाना आय ₹8.9 लाख बताई गई है। उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है, बागी गुट ने 20 से ज्यादा लोकसभा सांसदों का समर्थन होने का दावा किया है। टीएमसी में यह असंतोष पिछले कुछ समय से चल रहा है। पार्टी के अंदरूनी कलह ने अब इस्तीफों का रूप ले लिया है।


