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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कई आपत्तियों पर सख्त रुख अपनाया है।
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने बताया कि अपीलेट ट्रिब्यूनल के सदस्यों को प्रक्रिया की प्रकृति समझाने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे कल से इन ट्रिब्यूनल का काम शुरू हो सकेगा। TMC के वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अपीलेट ट्रिब्यूनल एक अर्ध-न्यायिक संस्था है, इसलिए उसे ट्रेनिंग देने की जरूरत नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचौली की बेंच ने इस पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि चुनाव आयोग के अलावा प्रक्रिया की बारीकियां समझाने वाला और कौन होगा? उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल में अनुभवी न्यायाधीश बैठेंगे, क्या आपको लगता है कि वे प्रभावित हो जाएंगे?
कोर्ट ने यह भी नाराजगी व्यक्त की कि SIR प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से चला रहे जजों को राजनीतिक ज्ञापन देकर अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। जस्टिस बागची ने कहा कि जज अपना काम कर रहे हैं, उन्हें बेवजह तंग नहीं किया जाना चाहिए।
जिला और सेशन कोर्ट के जज वर्तमान में लिस्ट से बाहर किए गए लोगों के दावों और आपत्तियों की जांच कर रहे हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना 1.75 लाख से 2 लाख मामलों का निपटारा हो रहा है। अब तक करीब 47 लाख मामलों का फैसला हो चुका है। कोर्ट को उम्मीद है कि 7 अप्रैल तक यह काम पूरा हो जाएगा। उसके बाद आगे की जरूरत पर विचार किया जाएगा।
TMC ने एक ही व्यक्ति द्वारा हजारों फॉर्म-6 (नए मतदाता पंजीकरण) जमा करने का मुद्दा उठाया। कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल केवल SIR प्रक्रिया पर सुनवाई कर रहा है, नए मतदाताओं से संबंधित मसला इसके दायरे में नहीं है। याचिकाकर्ता उचित मंच पर इसकी शिकायत कर सकते हैं। एक कांग्रेस उम्मीदवार ने भी कोर्ट में पहुंचकर शिकायत की कि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है। कोर्ट ने उन्हें थोड़ी देर रुकने को कहा और बताया कि अपीलेट ट्रिब्यूनल जल्द काम शुरू करेगा।
पश्चिम बंगाल में अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं। SIR के बाद फरवरी अंत में जारी अंतिम सूची में करीब 50-60 लाख नामों को संदिग्ध मानकर अलग रखा गया था। इनकी जांच चल रही है, जिसमें कुछ नाम बहाल हो रहे हैं और कुछ हटाए जा रहे हैं। TMC और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई याचिकाकर्ताओं ने प्रक्रिया में गड़बड़ी और बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोप लगाए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस बात पर सुनवाई कर रहा है कि चुनाव किस मतदाता सूची के आधार पर होंगे। साथ ही, अगर किसी का नाम न होने के कारण वह चुनाव में वोट नहीं डाल पाता और अपीलेट ट्रिब्यूनल से राहत मिलती है, तो भविष्य की सूची में उसका नाम शामिल करने का प्रावधान भी देखा जाएगा।
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