Supreme Court stayed on Aravalli अपने पूर्व के फैसले को रोका

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नेशनल ब्यूरो,नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली के मुद्दे (Supreme Court stayed on Aravalli) पर दिए गए अपने पूर्व के फैसले को स्थगित कर दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ ने कहा है कि सर्वेक्षण और अध्ययन के लिए एक नई समिति का गठन करना होगा।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वे इस मामले पर पुनर्विचार करेंगे और यह स्पष्टीकरण मांगेंगे कि क्या अरावली पर्वतमाला को 100 मीटर या उससे अधिक ऊँचाई वाले भू-आकृतियों तक सीमित करने से अनियंत्रित खनन को बढ़ावा मिलेगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ‘गैर-अरावली’ श्रेणी में आने वाले क्षेत्रों की विस्तृत पहचान करनी होगी।

केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह अदालत के फैसले का पालन करने के लिए तैयार है।केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल का कहना है कि वह अदालत के हर फैसले का पालन करने को तैयार है। मुख्य न्यायाधीश का कहना है कि कुछ स्पष्टीकरणों की आवश्यकता है। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में अपने फैसले में केंद्र सरकार को सार्वजनिक परामर्श के माध्यम से सतत खनन प्रबंधन योजना (एमपीएसएम) तैयार करने का आदेश दिया था।

पर्यावरणविद विमलेंदु के. झा ने इस सुनवाई से पहले कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली मामले, विशेषकर अरावली की परिभाषा पर स्वतः संज्ञान लिया है। अरबों वर्षों से विद्यमान एक पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे पुनर्परिभाषित किया जा सकता है? खनन और रियल एस्टेट के लिए अरावली की पुनर्परिभाषा करना जल संप्रभुता, वायु गुणवत्ता और उत्तर भारत की जलवायु पर हमला है।

यदि हम ऊंचाई के संकीर्ण दृष्टिकोण से अरावली की पुनर्परिभाषा करना शुरू कर दें, तो यह सिलसिला कहाँ जाकर रुकेगा? अदालत ने 21 जनवरी को दोबारा सुनवाई का नोटिस जारी किया है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अरावली की चारों राज्यों को सुनवाई खत्म होने से पहले शांत रहना चाहिए।



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