रायपुर। हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा में 13 से 15 मार्च तक हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में बस्तर, मणिपुर पर विशेष फोकस रहा।
इस तीन दिवसीय बैठक में संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित देशभर से लगभग 1487 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह सभा संघ की सर्वोच्च निर्णायक इकाई है, जहां संगठन के शताब्दी वर्ष के कामों की समीक्षा, भविष्य की योजनाओं और विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन मंथन हुआ।


छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद से मुक्ति की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। संघ के क्षेत्र और प्रांत संघचालकों ने बताया कि बस्तर धीरे-धीरे नक्सल प्रभाव से बाहर निकल रहा है, जिसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा गया।
छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार की नीतियों के तहत बस्तर में नक्सलवाद कमजोर पड़ रहा है, जहां हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण, मुठभेड़ें और विकास कार्य हो रहे हैं।
आरएसएस का फोकस यहां हिंदू समाज की सांस्कृतिक एकता, संगठित शक्ति, धर्म जागरण और ‘पंच परिवर्तन’ (व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर परिवर्तन) को व्यवहार में लाने पर रहेगा।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा से लौटे संघचालक डा. पूर्णेंदु सक्सेना और प्रांत संघचालक टोपलाल वर्मा ने मीडिया को बताया कि छत्तीसगढ़ में संघ की गतिविधियों में वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रांत में शाखाओं की संख्या बढ़कर 2188 हो गई है, जो पहले 1643 थी। रायपुर महानगर को 14 नगरों में विभाजित किया गया है, जहां 131 बस्तियों में 204 शाखाएं चल रही हैं। शताब्दी वर्ष में 84 प्रारंभिक वर्गों में 3890 स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
सभा में मणिपुर की स्थिति, पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश की वर्तमान परिस्थितियों और देश में संघ की भूमिका पर भी विचार-विमर्श हुआ। संघ ने अपने कार्य विस्तार, सामाजिक सद्भाव और सेवा कार्यों पर जोर दिया।
बैठक में संगठनात्मक ढांचे में बदलाव जैसे प्रांतों की संख्या बढ़ाकर संभाग बनाना और भविष्य की रणनीतियों पर भी फैसले हुए।


