बीते आठ सालों से देश में सबसे स्वच्छ शहर के रूप में खास पहचान बनाने वाले इंदौर में बीते कुछ दिनों में प्रदूषित पानी पीने से हुई कुछ लोगों की मौतें बेहद विचलित करने वाली हैं। पता चला है कि शहर के भागीरथपुरा इलाके में 25 दिसंबर को नलों से आना वाला पानी पीने के कारण सैकड़ों लोगों को उल्टी-दस्त होने लगे थे। हालत खराब होने पर अनेक लोगों को अस्पताल में भरती तक करवाना पड़ा, जिनमें से दस लोगों की मौत हो चुकी है।
बताया जाता है कि पिछले कई दिनों से लोग उल्टी-दस्त की शिकायत कर रहे थे, लेकिन न तो स्वास्थ्य विभाग ने और न ही नगर निगम ने इस पर ध्यान दिया। हालात बिगड़ने पर ही प्रशासन हरकत में आया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
पता तो यह भी चला है कि शुरुआत में जब लोगों ने उल्टी-दस्त की शिकायत की तो इसे सामान्य या मौसमी मान लिया गया था, लेकिन किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि एक इलाके से आखिर इतने लोगों को ऐसी शिकायत क्यों हो रही है।
जैसा कि सरकारी कामकाज का चलन है, इस घटना की खबर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंचने और सरकार के हरकत में आने के बाद एक दो लोगों को निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवाजे वगैरह की भी घोषणा कर दी है।
दरअसल असल सवाल जवाबदेही का है। आखिर जिस शहर को पूरे देश में लगातार सबसे स्वच्छ शहर का तमगा दिया जा रहा है और जहां की व्यवस्था को रोल मॉडल की तरह पेश किया जा रहा है, वहां एक पाइपलाइन में लीकेज हो जाने से दस लोगों की जान कैसे चली गई?
अब तो यह भी याद दिलाना पड़ता है कि मोदी सरकार ने कभी देश में बड़े धूमधाम से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का ऐलान किया था। इंदौर इस प्रोजेक्ट के अग्रणी शहरों में शुमार था जहां अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैय्या कराई जानी थी। वास्तविकता यह है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।
इंदौर में दूषित पानी से हुई आम लोगों की मौत आपराधिक लापरवाही का नतीजा है, जिसकी वजह से यह जानने में आठ दिन लग गए कि यह हादसा पाइपलाइन में लीकेज के कारण हुआ है, जिसके कारण पानी प्रदूषित हो गया।
यह कितना शर्मनाक है कि एक ओर भारत को विकसित देश बनाए जाने और विश्व गुरु होने के दावे किए जा रहे हैं और यहां प्रदूषित पानी पीने से लोगों की मौत हो जा रही है, जिनमें अनेक बच्चे भी हैं।
यह जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए कि जब भागीरथपुरा के लोग पिछले कई दिनों से खराब पानी की आपूर्ति की शिकायत कर रहे थे, तब प्रशासन ने चुप्पी क्यों ओढ़ रखी थी!

