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नई दिल्ली। चुनाव प्रक्रिया में नामांकन पत्रों (Nomination paper) की जांच एक महत्वपूर्ण चरण है, जो जनप्रतिनिधित्व कानून , 1951 की धारा 36 के तहत होती है। हाल के घटनाक्रमों में विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग और रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा भाजपा नेताओं, यहां तक कि (Prime Minister Narendra Modi)समेत अन्य प्रमुख नेताओं के नामांकन पत्रों में आई गड़बड़ियों को नजरअंदाज कर स्वीकार कर लिया जाता है, जबकि विपक्षी उम्मीदवारों पर सख्ती बरती जाती है।
मोदी समेत तमाम भाजपा नेताओं पर लगते हैं आरोप
पीएम नरेंद्र मोदी समेत तमाम भाजपा नेताओं और वर्तमान में झारखंड में भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी के मामले को उदाहरण के तौर पर पेश किया जा रहा है, जहां नाम गलत लिखने, वैवाहिक स्थिति छिपाने, शैक्षणिक योग्यता छिपाने और अन्य कमियों के बावजूद नामांकन स्वीकार हो गया।
दो मामले अलग अलग निर्णय
राज्यसभा चुनाव 2026 के दौरान जहां कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी सिर्फ इसलिए रद्द कर दी गई क्योंकि उन्होंने कोर्ट की एक नोटिस का उल्लेख फार्म में नहीं किया था वहीं झारखंड में भाजपा समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवार परिमल नाथवानी जो रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े माने जाते हैं के नामांकन पत्र में गंभीर कमियां होने के बावजूद उसे मंजूरी दे दी गई। कांग्रेस और झामुमो ने आरोप लगाया कि फॉर्म में नाम ही सही से नहीं भरा गया था, कई अनिवार्य कॉलम खाली थे और जानकारी अधूरी थी। रिटर्निंग अधिकारी ने शुरू में नामांकन पर रोक लगाई और सुधार का समय दिया, जिसके बाद इसे वैध घोषित कर दिया गया।कांग्रेस नेताओं ने इसे स्पष्ट दोहरा मापदंड बताया।
मीनाक्षी बनाम नाथवानी
मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन एक निजी शिकायत का खुलासा न करने के आधार पर रद्द कर दिया गया उन्हें सुनवाई का भी समय नहीं दिया गया। चुनाव आयोग ने भी उनकी बात नहीं सुनी वहीं नाथवानी को अतिरिक्त समय देकर मौका दिया गया। झारखंड कांग्रेस प्रमुख केशव महतो कमलेश ने कहा कि यह चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। इस घटना से भाजपा को राज्यसभा में अतिरिक्त सीट मिलने का रास्ता साफ हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी के नामांकन पत्रों पर गंभीर आरोप
विपक्ष का दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नामांकन और हलफनामों में भी बार-बार गड़बड़ियां सामने आई हैं, लेकिन उन्हें मंजूरी मिल गई। 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में मोदी के शैक्षिक योग्यता संबंधी हलफनामों पर विवाद हुआ, जहां डिग्री विवरण पर सवाल उठे, लेकिन (election Commission) ने इन्हें स्वीकार किया। विपक्षी नेता आरोप लगाते हैं कि यदि विपक्षी उम्मीदवारों पर यही मानक लागू होता तो कई नामांकन रद्द हो जाते।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय कहते हैं कि अपने नामांकन पत्र में तो मोदी जी ने अपनी वैवाहिक स्थिति का विवरण भी कई बार सही नहीं भरा, शैक्षणिक योग्यता पर भी उनके सवाल खड़े होते हैं। उनके नामांकन से जुड़े कुछ विवाद देखें
गांधीनगर के प्लॉट का विवाद
क्या था मामला:
साल 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव हलफनामे में नरेंद्र मोदी ने गांधीनगर (सेक्टर-1) में प्लॉट नंबर 411 के मालिकाना हक की घोषणा की थी।
विवाद: 2012 और 2014 के चुनावी हलफनामों में इस प्लॉट का जिक्र गायब था। इसके बाद के घोषणापत्रों में उन्होंने प्लॉट नंबर 401/A में एक-चौथाई हिस्सेदारी घोषित की।
आरोप: साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि आधिकारिक भूमि रिकॉर्ड में ट्रांसफर या बिक्री की प्रविष्टि न होने के बावजूद उन्होंने चुनावी हलफनामे में संपत्ति को छिपाया या गलत तरीके से प्रस्तुत किया।
2. वाराणसी और वडोदरा नामांकन में अंतर
क्या था मामला: 2014 के लोकसभा चुनाव में जब उन्होंने दो सीटों वडोदरा और वाराणसी से पर्चा भरा, तो दोनों हलफनामों में बैंक बैलेंस की राशि में लगभग ₹14.34 लाख का अंतर था।
भाजपा का स्पष्टीकरण: पार्टी ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि दोनों नामांकन पत्रों को तैयार करने की तारीखों में अंतर था। वडोदरा के बाद वाराणसी का पर्चा भरने के बीच में पार्टी द्वारा उनके चुनावी बैंक खाते में फंड ट्रांसफर किया गया था, जिससे यह अंतर आया।
3. अचल संपत्ति का ‘शून्य’ होना
क्या था मामला: 2024 के लोकसभा चुनाव हलफनामे में पीएम मोदी ने अपनी अचल संपत्ति (जमीन, मकान) शून्य घोषित की।
पत्नी का नाम छिपाने का आरोप
संपत्तियों के अलावा, 2014 से पहले के हलफनामों में वैवाहिक स्थिति वाले कॉलम को खाली छोड़ने और 2014 में पहली बार जसोदाबेन का नाम पत्नी के रूप में दर्ज करने को लेकर भी बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ था।
सुरत लोकसभा चुनाव 2024 में भी किया गया था खेल
: भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन तकनीकी आधार पर रद्द कर दिया गया, जिससे भाजपा उम्मीदवार बिना मुकाबले जीत गया। विपक्ष ने इसे साजिश बताया।
खजुराहो और अन्य सीटें
2024 लोकसभा चुनाव में कई जगहों पर विपक्षी उम्मीदवारों के पेपर अधूरे बताकर रद्द किए गए, जबकि भाजपा उम्मीदवारों को राहत दी गई।
राज्यसभा के भाजपा उम्मीदवारों के मामलों में अनदेखी
विभिन्न राज्यों में भाजपा उम्मीदवारों के हलफनामों में संपत्ति, आपराधिक मामले या नामांकन त्रुटियों की अनदेखी का आरोप लगा है। कांग्रेस नेताओं द्वारा दावा किया गया कि भाजपा नेताओं के हलफनामों की जांच की जाए तो कई सांसद अयोग्य पाए जाएंगे। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन मामले में एक कोर्ट नोटिस जो आपराधिक मामला नहीं था को आधार बनाकर नामांकन रद्द किया गया, जबकि भाजपा उम्मीदवारों को नाम गलत लिखने जैसी गलतियों पर भी छूट मिली।अन्य उदाहरण और पैटर्न
भाजपा को मौजूदा चुनावी प्रक्रिया से मिल रहा फायदा
यह सारे पैटर्न दिखाते हैं जहां सत्ताधारी भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की व्याख्या लचीली की जाती है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष का भरोसा डिग रहा है। मीनाक्षी नटराजन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, जिसे विपक्ष ने और साजिश बताया।यदि यही स्थिति बनी रही तो लोकतंत्र की मूल भावना समान अवसर और निष्पक्ष चुनाव की जरूरत खतरे में पड़ जाएगी।
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