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नई दिल्ली। NEET पेपर लीक मामले में लाखों छात्रों का भविष्य खराब करने के मामले में पुणे के जिस मॉर्डन कालेज ऑफ़ साइंस एंड कॉमर्स की शिक्षिका मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया गया है वह कॉलेज भीमा कोरेगांव में 2018 में हुई हिंसा में शामिल लोगों के परिवार के द्वारा संचालित किया जाता रहा है।

इस परिवार का आरएसएस और बीजेपी से बेहद गहरा नाता रहा है। भाजपा के कई शीर्ष नेता जिनमें किरण रिजिजू , नितिन गडकरी , विनोद तावड़े समेत कई केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से संबंध हैं। इन नेताओं का इस कॉलेज में आना जाना रहा है।

गौरतलब है 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव में दलितों की एक सभा पर हमले के बाद महाराष्ट्र भर में विरोध प्रदर्शन और हिंसा फैल गई थी । इस घटना में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए थे ।

हिंदुत्व समर्थक नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ शुरू हुई जांच ने बाद में एक चौंकाने वाला मोड़ ले लिया, जब कई जाने-माने कार्यकर्ताओं को इस कार्यक्रम में भड़काऊ भाषणों के माध्यम से हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस कार्यक्रम को एल्गार परिषद भी कहा जाता है।
गौरतलब है कि पहली एफआईआर में हिंसा के लिए हिंदुत्व समर्थक नेताओं म संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे को जिम्मेदार ठहराया गया। यह मिलिंद एकबोटे का परिवार ही मॉर्डन कॉलेज चलाता है मिलिंद का बड़ा भाई गजानन एकबोटे जो पहले सरकारी डॉक्टर था इस कॉलेज का चेयरमैन है।
दरअसल मॉर्डन कॉलेज का RSS और बीजेपी से बेहद गहरा नाता रहा है। चेयरमैन गजानंद एकबोटे की पत्नी ज्योत्सना पुणे में भाजपा की पार्षद रही हैं वहीं मॉर्डन कालेज की प्रिंसिपल निवेदिता एकबोटे भी मौजूद समय में बीजेपी की पार्षद हैं ।
2018 के बाद से ही एकबोटे परिवार की तूती बोलती रहती है । गजानंद के भाई मिलिंद एकबोटे, जो आरएसएस के पूर्व सदस्य और पुणे से भाजपा के पार्षद रहे हैं, समस्त हिंदू अगाड़ी नामक एक संगठन चलाते रहे हैं और वैलेंटाइन डे के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने सहित अपने आक्रामक हिंदुत्ववादी रुख के लिए जाने जाते हैं।
एकबोटे के खिलाफ दंगा, अतिक्रमण, आपराधिक धमकी और समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाने के प्रयास के कई मामले लंबित हैं।
द लेंस के पास इस बात के सुबूत हैं गजानंद परिवार का भाजपा के कई दिल्ली में मौजूद शीर्ष नेताओं के घर भी आना जाना रहा है।जिनमे विनोद तावड़े और नितिन गडकरी आदि शामिल हैं।
इस बात की भी द लेंस को तस्दीक हुई है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ गजानंद बैठकें कर चुका है। तारीख़ें बताती हैं कि भीमा कोरेगांव के बाद गजानन अपने भाई के समर्थन में खुलकर आ गया था और उसने कहा था कि एकबोटे को वामपंथियों द्वारा फंसाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने दलित नेता और गुजरात विधायक जिग्नेश मेवानी और जेएनयू छात्र उमर खालिद को एल्गार परिषद को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किए जाने का विरोध किया था।
नहीं भुला जाना चाहिए कि NEET पेपर घोटाले में राजस्थान से गिरफ्तार दिनेश बिवाल के भी भाजपा और आरएसएस से गहरा नाता रहा है।कई पोस्टरों, होर्डिंग्स और सोशल मीडिया पोस्ट में बिवाल को भाजपा पदाधिकारी बताया गया है।
अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर उन्होंने खुद को ‘भाजपा जयपुर ग्रामीण के पूर्व जिला मंत्री’ के रूप में पहचाना है।

अब भाजपा के साथ उनके कथित संबंधों को लेकर सवाल उठ रहे हैं इनकी भी तस्वीरें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर वग़ैरह के साथ तस्वीर आई है। दिनेश की ख़ुद की तस्वीर बच्चों के साथ हैं जो सभी गणवेश पहन रखे हैं।
दिलचस्प यह है कि अब तक NEET पेपर घोटाले में आधा दर्जन से ज़्यादा गिरफ़्तारियाँ हुई हैं उनमें सबसे ज़्यादा गिरफ़्तारी पुणे में हुई है, यहाँ से मनीषा मंधारे, पी वी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे और धनंजय लोखंडे की गिरफ्तारी हुई है।
यहां यह बताना ज़रूरी है कि मनीषा बाघमारे नाम की ब्यूटीशियन मॉर्डन कॉलेज की शिक्षिका मनीषा मंधारे और धनंजय लोखंडे के साथ पेपर की खरीद में सीधे तौर पर शामिल थी।
जांच एजेंसियों को अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि यह घोटाले कबसे चला आ रहा है ? लेकिन राजस्थान से गिरफ्तार दिनेश बिवाल और उसके भाई मांगीलाल ने पिछले साल अपने परिवार के पाँच सदस्यों के एक साथ प्रवेश का दावा किया था।
अब तक जो सीबीआई की जांच चल रही है वो मुख्य रूप से NEET 2026 में पेपर लीक के मामले की चल रही है लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इसकी जड़े बेहद गहरी और राजनैतिक हैं।
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