NAKATI PROTEST: राजधानी रायपुर से लगा नकटी गाँव एक बार फिर से चर्चा में है, चर्चा में इसलिए है क्योंकि एक बार फिर से इसे उजाड़े जाने की खबर मिली है। दरअसल 7 महीने पहले इसी गाँव में विधायक कॉलोनी बनाये जाने की चर्चा तेज थी और गाँव वालों के जबरदस्त विरोध के बाद भाजपा सरकार को झुकना पड़ा था और इस आंदोलन को भाजपा के सांसद और पूर्व विधायक व छत्तीसगढ़ क्रांति सेना का समर्थन भी मिला था सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आश्वासन दिया था की किसी भी गरीब का घर नहीं उजड़ेगा लेकिन गुरु घासीदास जयंती के अगले ही दिन 19 दिसंबर को गांव के ही एक व्यक्ति को सूचना मिली की आज नकटी गाँव में नोटिस आने वाला है और शायद आज ही घर भी उजाड़ा जाये। इसके लिए माना पुलिस थाना में अतिरिक्त फ़ोर्स भी जुटाई जा रही है ऐसी ख़बरें मिली। इतना पता चलते ही ग्रामीण महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग अपने अपने हाथों में लाठी-डंडे पकड़े अपने घरों से बाहर आ गए और इंतजार करते बैठे रहे की कोई नोटिस देने आये तो उसे जवाब दिया जाए। इस बीच दोपहर होते-होते छतीसगढ़ क्रान्ति सेना के कार्यकर्ता भी नकटी पहुंचे और ग्रामीणों का समर्थन देने की बात कहते हुए उनके साथ बैठ गए फिर से नोटिस जारी किये जाने की आशंकाओं ने अब ग्रामीणों की नींद,चैन, भूख प्यास सब छीन ली है।
कैसे आया था चर्चा में ?
राजधानी रायपुर का नकटी गांव जो विधायक कॉलोनी बनाने के नाम पर चर्चा में आया। इस गांव के 85 घरों को उजाड़कर नई विधायक कॉलोनी बनाई जाने वाली थी। दावा तो ये भी किया जा रहा था कि ये ज़मीन किसी प्राइवेट कंपनी को लीज में दी जाएगी इसके अलावा तोड़े जाने वाले घरों में कई लोग ऐसे भी थे जिन्हें हाल ही में उसी जमीन पर पीएम आवास बनाने के लिए किश्त दी गई है और घर का लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा भी हो चुका है। इस मामले में कोई भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि खुलकर जवाब नहीं दे रहा था, जिन 85 घरों को पूर्व में नोटिस दिया गया था उनमें 310 से ज्यादा लोग निवास करते हैं। ये लोग रोज- कमाते हैं और गुजर बसर करते हैं।
बीजेपी के सांसद और पूर्व विधायक ने किया था विरोध
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर नकटी गांव के हित में विधायक कॉलोनी के निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी। सांसद ने कहा था कि विधायक कालोनी रिक्त स्थान पर बनें, न की गरीबों का मकान तोड़कर। सांसद ने अपने पत्र में लिखा था कि नकटी में खसरा नंबर 460, रकबा 15.4790 हेक्टेयर भूमि पर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड विधायक कॉलोनी बना रहा है। इस भूमि पर वर्षों से लगभग 80 से अधिक गरीब परिवार वर्षों से मकान बनाकर रह रहे हैं।
इन परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घर बनाए गए हैं। वहीं कई शासकीय भवन सामुदायिक भवन भी इसी भूमि पर स्थित हैं। ग्राम पंचायत और ग्रामसभा ने भी इस योजना पर रोक लगाने की बात की है। इस भूमि को इनके पूर्वजों ने चारागाह के लिए सुरक्षित किया है और यह गांव की साझा भूमि है। इस ग्रामीण वर्तमान में ग्राम पंचायत की व्यवस्था के अनुसार रह रहे हैं।
दूसरी तरफ इसी क्षेत्र के पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल ने गांव वालों से मिलकर कहा था कि हम हर संभव कोशिश में हैं कि उनकी परेशानी दूर हो।
नकटी पर ही क्यों है सरकार की नजर
ख़ास बात ये है कि यह गांव रायपुर के स्वामी विवेकानंद विमानतल से करीब एक किलोमीटर दूर है। इसके इर्द-गिर्द कई उद्योगपतियों और नेताओं की जमीनें है। जमीनों की कीमत भी आसमान छू रही है। अब सरकार की भी इस जमीन पर नजर गड़ी हुई है। गांव के सरपंच बिहारी लाल यादव ने बताया कि यहां लगभग 50 सालों से परिवार निवास कर रहें हैं। 7 महीने पहले प्रशासन ने अचानक घर तोड़ने का नोटिस दिया। जिन घरों को तोड़ने का नोटिस दिया गया, उनमें प्रधानमंत्री आवास भी शामिल हैं। अगर वो अवैध हैं तो इतने सालों से प्रशासन ने कार्रवाई क्यों नहीं की।
ग्रामीणों की मजबूरी और नाराजगी
ग्रामीणों में विधायक अनुज शर्मा से लेकर विष्णु देव साय सरकार के खिलाफ ज़बरदस्त नाराज़गी है, विरोध के स्वर का अंदाजा इस बात से लगा सकतें हैं की गांव के सरपंच उपसरपंच और रहवासी खुद बीजेपी के कार्यकर्ता और समर्थित सदस्य हैं लेकिन वे अब अपनी ही सरकार के इस फैसले से नाराज़ हैं और खुलकर विरोध जता रहें हैं।
प्रशासन नकटी गांव की बस्तियों को अवैध अतिक्रमण बताता रहा है। इस गांव में ऐसे कई ग्रामीण हैं जिन्हें आवास योजना के तहत केवल आधी राशि ही मिली लेकिन घर के सामने स्वीकृत राशि पूरा-पूरा लिखा गया जिससे सवाल तो ये भी उठता है की क्या यहां के प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस योजना के तहत राशि आवंटन में किसी प्रकार का घोटाला किया है ? और क्या घोटाला है तो इसकी सरकार जांच करवाएगी ? क्योंकि यहाँ बने आवास योजना के तहत पूर्व की कांग्रेस सरकार में चली इंदिरा आवास योजना से लेकर बीजेपी सरकार की योजना प्रधानमन्त्री आवास योजना के तहत बनाये गए घर भी शामिल हैं जो बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए मुसीबत बन सकती है और शायद ये भी वजह हो सकती है कि विपक्ष में बैठी कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुई है और न ही मैदान में खुलकर समर्थन करते नजर आ रही है।
लाठी पकड़े डर में बैठे हैं ग्रामीण
द लेंस ने कई ग्रामीणों से बात की जिनमें महिलायें,बच्चे बूढ़े शामिल थे सभी को डर था कि क्या वाकयी हमारा आशियाना उजड़ने वाला है। चिंता की लकीरें उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी डर इस बात का भी था कि क्या उनकी जमापूंजी से बनाये ये घर अब ध्वस्त हो जाएंगे और क्या अब फिर से उन्हें ऐसे ही प्रदर्शन में बैठना पड़ेगा।
क्या झूठा था आश्वासन, सरकार उजाड़ेगी गरीबों की बस्ती!
गांववालों के इस दर्द से और भी कई सवाल उठ रहें हैं कि क्या खूबसूरत शहर बनाने की कीमत सिर्फ़ गरीबों को ही चुकानी पड़ेगी? क्या इन बेघर परिवारों को कभी न्याय मिलेगा? प्रशासन इसे अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बता रहा है, लेकिन क्या विकास का ये मॉडल बेघर हुए लोगों के दर्द को समझ पाएगा?फिलहाल आश्वासन मिलने के बाद भी नोटिस का डर ग्रामीणों को सता रहा है और अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है देखना होगा कि सरकार इन गरीबों के लिए अब क्या हल निकालेगी।

