
नेशनल ब्यूरो,नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा 12 अरब डॉलर के गोल्ड बेचे जाने के मामले में आरबीआई द्वारा किए गए खंडन के बाद नए तथ्य सामने आए हैं। गौरतलब है कि ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स द्वारा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर लगाया गया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के प्रभाव से अपनी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की रक्षा के लिए सोने के कुछ भंडार बेचे जाने की संभावना हैं। जिस पर RBI ने इस खबर को फर्जी बताते हुए अप्रैल माह तक के गोल्ड स्टॉक का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया था। Modi government
आरबीआई द्वारा खबर का खंडन किए जाने के बाद तमाम विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया पर नए दस्तावेजों के साथ आरबीआई के दावों को चुनौती दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जो आंकड़े RBI द्वारा दिए गए वह 22 मई को जारी किए गए हैं लेकिन उसमें सोने का स्टॉक 26 अप्रैल तक दिखाया गया है जबकि ब्लूमबर्ग 22 मई को खत्म हुए सप्ताह की बात कर रहा है।
काबिलेगौर है कि ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के सीनियर इंडिया इकोनॉमिस्ट अभिषेक गुप्ता ने कहा था कि आरबीआई ने 22 मई तक के दो हफ्तों में लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचा है, जबकि साथ ही 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां खरीदीं। सोने पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बावजूद इसका मूल्य घटा जो सामान्य रूप से सोने और डॉलर के मूल्य को बढ़ाना चाहिए था। इससे संकेत मिलता है कि आरबीआई सोना बेच रहा था।
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ संदीप मनुधने ने नए आंकड़ों के साथ कहा है कि सोने के स्टॉक का मूल्य 15 मई से 22 मई के बीच 11.45 ट्रिलियन रुपये से घटकर 10.98 ट्रिलियन रुपये हो गया यानि इसमें 4 फ़ीसद की गिरावट हुई थी। डॉलर के संदर्भ में भी यही गिरावट लगभग 4 फ़ीसद की हुई।
संदीप का तर्क है कि यदि सोने का कुल भंडार समान रहता है, तो यह तभी संभव है जब कीमतों में इसी अनुपात में गिरावट आई हो लेकिन उस सप्ताह सोने की कीमतें लगभग स्थिर रहीं। उनका दावा है कि इसलिए यदि आरबीआई ने सोना बेचा है, तो इसका मतलब लगभग 20-30 टन सोना बेचा गया है। संदीप का दावा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट से मिलता है। देखना है कि क्या इन नए दावों पर सरकार की कोई और प्रतिक्रिया आती है।


