रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में जीवनरेखा मानी जाने वाली केलो नदी (Kelo Nadi) को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्राकृतिक नालों, पहाड़ों और बरसाती जल से सालभर जीवंत रहने वाली केलो नदी का पानी उद्योगों को महज 1 रुपये प्रति लीटर में बेच दिए जाने का आरोप सिंचाई विभाग पर लगा है, जबकि आम जनता को पीने के लिए 15 रुपये प्रति लीटर में बाजार का बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
यह आरोप रायगढ़ बचाओ – लड़ेंगे रायगढ़ अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लगाए हैं। संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने इस मामले में रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को लिखित शिकायत पत्र सौंपकर तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि सिंचाई विभाग में पदस्थ तत्कालीन कार्यपालन अभियंता एस.के. गुप्ता ने अपने कार्यकाल के दौरान केलो नदी में समाहित होने वाले गेरवानी और बंजारी नालों के प्राकृतिक पानी को उद्योगों को आवंटित कर दिया। आरोप है कि यह पानी मे. सिंघल एनर्जी और मे. श्याम इस्पात, तराईमाल को अनुबंध के तहत दिया गया।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह जल केलो नदी परियोजना का हिस्सा था, जिसका उपयोग जिले का जलस्तर बढ़ाने, किसानों को सिंचाई के लिए पानी देने, निस्तार और आम जनता को पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जाना था। केलो डैम के निर्माण को भी इसी जनहित उद्देश्य के तहत भारत सरकार के जल संसाधन विभाग से स्वीकृति मिली थी।
प्राकृतिक जल पर जनता का हक, उद्योगों को लाभ
रायगढ़ बचाओ–लड़ेंगे रायगढ़ के सदस्यों का आरोप है कि प्राकृतिक जल, जो जिले की जनता का अधिकार है, उसे निजी स्वार्थ के तहत उद्योगों को सौंप दिया गया। इससे एक ओर उद्योगों को सस्ता पानी उपलब्ध कराया गया, वहीं दूसरी ओर जनता को औद्योगिक अपशिष्ट और रासायनिक प्रक्रिया से शुद्ध किए गए पानी पर निर्भर होना पड़ रहा है।
संगठन ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए। प्रस्तावित समिति में जिला पंचायत रायगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, केलो परियोजना के कार्यपालन अभियंता, शासकीय पॉलिटेक्निक रायगढ़ के प्राचार्य, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायगढ़ के प्राचार्य, पीएचई रायगढ़ के कार्यपालन अभियंता और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी को शामिल किया जाए।
साथ ही जांच पूरी होने तक उद्योगों को दिए गए जल आवंटन अनुबंध को जनहित में निरस्त करने की अनुशंसा प्रदेश शासन को भेजने की मांग की गई है।
रायगढ़ बचाओ–लड़ेंगे रायगढ़ के सदस्यों ने कहा कि यदि प्राकृतिक जल का इस तरह व्यावसायिक दोहन होता रहा तो आने वाले समय में जिले में गंभीर जल संकट खड़ा हो सकता है।
फिलहाल जिला प्रशासन ने शिकायत को संज्ञान में लेते हुए जांच का भरोसा दिलाया है।
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