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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में गुरुवार को कवासी लखमा (Kawasi Lakhma) और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल विशेष अदालत में पेश हुए। इनके साथ ही 59 नए आरोपियों को भी कोर्ट में पेश किया गया, जिनमें 28 आबकारी विभाग के अधिकारी शामिल हैं। अदालत ने सभी आरोपियों के बयान दर्ज किए।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने इस घोटाले में अब तक 82 लोगों को आरोपी बनाया है।
अधिवक्ता फैजल रिजवी ने बताया कि एजेंसी पहले ही अदालत में फाइनल चार्जशीट दाखिल की गई है। पहले इस मामले में 23 आरोपी थे, जिन्हें बढ़ाकर 82 कर दिया गया है। जांच के दौरान इन आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया था और बिना गिरफ्तारी के ही चार्जशीट दाखिल की गई है। कई आरोपियों ने अदालत में धारा 88 के तहत आवेदन भी दिया है। इस आवेदन के आधार पर आरोपियों को जमानत मिल जाएगी।
इससे तीन दिन पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने दो शराब निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके ट्रक जब्त किए थे। वहीं, इस मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय राजीव भवन में कार्यरत एक अकाउंटेंट सहित चार लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया गया था।
जांच एजेंसियां प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की भी तलाश कर रही हैं, जो लंबे समय से फरार बताए जा रहे हैं। एजेंसियां उनकी भूमिका और उनसे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।
दरअसल, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में लगभग 3200 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की बात सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में आरोप है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के अधिकारी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इसमें और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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