Jamboree पर भाजपा के झगड़े में दिल्ली भी शामिल

NFA@0298
8 Min Read


रायपुर। छत्तीसगढ़ स्काउट एवं गाइड परिषद को लेकर निर्वाचित अध्यक्ष सांसद बृजमोहन अग्रवाल और पदेन अध्यक्ष बन गए मंत्री गजेंद्र यादव के बीच के विवाद में शुक्रवार को दिल्ली से आए स्काउट एवं गाइड के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल जैन के बृजमोहन अग्रवाल के दावे को खारिज कर देने के बाद अब ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं जिनसे अनिल जैन के ही दावे पर सवाल उठने लगे हैं।

अनिल जैन ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा, ‘निर्वाचित अध्यक्ष जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। 5 साल अध्यक्ष रहने का कोई प्रावधान नहीं है। अपनी समिति से चुनाव कराना अमान्य है।’

यह बयान सांसद बृजमोहन अग्रवाल के पांच साल के निर्वाचित अध्यक्ष के दावे को खारिज करने वाला था।

अनिल जैन ने यहां तक कहा कि बृजमोहन अग्रवाल ने खुद से ही परिषद का चुनाव करा लिया, जबकि इस चुनाव में नेशनल स्काउट की टीम ही मौजूद नहीं थी, तो चुनाव वैध कैसे? उन्होंने कहा कि संविधान में पदेन अध्यक्ष का प्रावधान है, जिसे सरकार नॉमिनेट करती है वही अध्यक्ष होता है। चुनाव नेशनल ऑब्जर्वर के बगैर हुआ है तो उस चुनाव को वैध नहीं कहा जा सकता।

अनिल जैन ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल के दावे को खारिज तो कर दिया पर सवाल उठने लगा है कि क्या ऐसा करते समय अनिल जैन को उनके खुद के दफ्तर से भारत स्काउट्स एवं गाइड के डायरेक्टर द्वारा जारी उस पत्र का ध्यान नहीं रहा जिसमें डायरेक्टर ने सक्षम प्राधिकारी का जिक्र करते हुए बृजमोहन अग्रवाल की नियुक्ति के प्रस्ताव को अनुमोदित किया था ?

द लेंस को इस बारे में जो दस्तावेज मिले हैं उन्हें देखें तो समझ आता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बृजमोहन अग्रवाल की नियुक्ति को खारिज करने से पहले खुद अपने ही दफ्तर के इन दस्तावेजों का अवलोकन नहीं किया था।

दस्तावेजों की मानें तो स्काउट–गाइड नियमों के जानकारों के अनुसार, राष्ट्रीय जंबूरी के लिए कम से कम दो से तीन महीने की तैयारी आवश्यक होती है। देशभर के राज्यों और अन्य देशों को कोटा देना, नाम सहित ऑनलाइन पंजीयन, संचालन के लिए समितियां–उपसमितियां बनाना, टेंट, एरिना, लाइट, पानी, शौचालय, भोजन, सड़क, एडवेंचर जोन और प्रमाणपत्र–कीट जैसी व्यवस्थाएं एक हफ्ते में करना असंभव है।

ऐसे में यह दावा कि 2 जनवरी 2026 को राज्य परिषद की बैठक में बालोद जंबूरी का प्रस्ताव पारित हुआ, पूरी तरह झूठा बताया जा रहा है। सवाल यह भी उठाया गया कि जब 2 जनवरी को प्रस्ताव पास हुआ, तो 8 दिसंबर 2025 को बालोद में भूमि पूजन कैसे हो गया, जबकि उस वक्त गजेन्द्र यादव की कथित नियुक्ति भी नहीं हुई थी।

आरोप है कि मंत्री बनते ही गजेन्द्र यादव ने नियमों को दरकिनार कर पदाधिकारियों को हटाया, प्रतिनियुक्ति पर नियमविरुद्ध नियुक्तियां कीं, और राज्य स्काउट–गाइड को मिलने वाली 10 करोड़ की राशि संस्था के बजाय बालोद के शिक्षा अधिकारी के खाते में डलवा दी। बिना किसी वैध समिति के काम शुरू होना भी भ्रष्टाचार की मंशा को दर्शाता है।

विवाद के बीच यह भी स्पष्ट किया गया है कि बालोद जंबूरी राष्ट्रीय मुख्यालय का नहीं, बल्कि राज्य स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ का कार्यक्रम है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन और चीफ नेशनल कमिश्नर डॉ. के.के. खंडेलवाल पहले ही इसे राज्य स्तरीय आयोजन बता चुके हैं।

आरोप लगाने वालों का कहना है कि मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन को अंधेरे में रखकर गलत जानकारी दी गई, जिससे लाखों स्काउट–गाइड्स की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हुआ। पूरे मामले ने स्कूल शिक्षा मंत्री की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ अनिल जैन के बयान के बाद दिलचस्प यह है कि इस पूरे विवाद में भाजपा के भीतर की सिर फुटौव्वल में अब दिल्ली भाजपा का भी एक हिस्सा शामिल हो गया है । साफ है कि भाजपा के भीतर का यह झगड़ा अब हाई प्रोफाइल तो हो ही गया है,दोनों तरफ से कोई झुकने को भी तैयार नहीं है।

पदेन अध्यक्ष गजेंद्र जैन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के दिग्गज पदाधिकारी रह चुके बिसरा राम यादव के पुत्र हैं।इस नाते गजेंद्र यादव को छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक पार्टी संगठन से जुड़े लोगों का साथ मिल रहा है,ऐसी चर्चा है।लेकिन पहली बार विधायक बने गजेन्द्र यादव का अपना राजनीतिक कद बृजमोहन अग्रवाल के मुकाबले बेहद छोटा है।ऐसे में भाजपा की राजनीति के प्रेक्षक इस बात पर भी हैरान हैं कि पार्टी छत्तीसगढ़ के अपने एक अत्यंत प्रभावशाली नेता की आपत्तियों को दरकिनार कर उनके लिए असुविधाजनक स्थिति ही खड़ी कर रही है।

उल्लेखनीय है कि बृजमोहन अग्रवाल ने राष्ट्रीय जंबूरी में सीधे पंद्रह करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप ही नहीं लगाए हैं बल्कि गजेंद्र यादव की नियुक्ति को भी अवैधानिक कहा और हाई कोर्ट में चुनौती दी है। बृजमोहन अग्रवाल ने सीधा आरोप लगाया है कि बालोद में जंबूरी के आयोजन के लिए टेंट से लेकर भोजन व्यवस्था तक के काम हो जाने के बाद टेंडर जारी किए गए और अपने एक चहते ठेकेदार/सप्लायर को ही काम दिलवाया गया।

दिलचस्प यह है कि प्रदेश की भाजपा सरकार भी अपनी ही पार्टी के सांसद के लगाए आरोपों पर चुप है।जानकार सूत्र कहते हैं कि बृजमोहन अग्रवाल के आरोपों में एक यह भी है कि राज्य सरकार से राष्ट्रीय जंबूरी के लिए जारी की गई 10 करोड़ रुपयों की राशि स्काउट एवं गाइड के खाते में जमा होने की बजाए आयोजन के जिले बालोद के जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में जमा कर दी गई।

द लेंस को पता चला है कि पहले इस राशि को बालोद के कलेक्टर के हवाले करने की योजना थी लेकिन कहा जा रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी को काम की जरूरतों के लिहाज से सुविधाजनक माना गया तो उनके खाते में यह राशि जमा कर दी गई।

इस मामले में हाई कोर्ट के रुख का इंतजार है पर भाजपा संगठन की दरार तो खुल कर सामने है।

यह भी पढ़ें : क्या हाई कोर्ट में बृजमोहन अग्रवाल की चुनौती की वजह से उप मुख्यमंत्री ने जंबूरी से बना ली दूरी?



Source link

Share This Article
Leave a Comment