लेंस डेस्क। PSLV Mission Launch: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए साल 2026 की शुरुआत झटके के साथ हुई। सोमवार को श्रीहरिकोटा से छोड़ा गया PSLV-C62 रॉकेट अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका। प्रक्षेपण के शुरुआती चरण सामान्य रहे, लेकिन तीसरे चरण के अंत में रॉकेट की दिशा में अचानक विचलन आ गया। इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि उड़ान के दौरान वाहन की स्थिति में गड़बड़ी हुई और यह तय पथ से भटक गया। अभी डेटा का विश्लेषण जारी है, लेकिन मिशन के सफल होने की संभावना बहुत कम लग रही है।
यह PSLV की 64वीं उड़ान थी, जिसमें EOS-N1 (जिसे अन्वेषा भी कहा जाता है) नामक उपग्रह और DRDO के विकसित निगरानी उपग्रह के अलावा कुल 16 उपग्रह शामिल थे। इनमें भारत के स्टार्टअप्स, नेपाल, ब्राजील, ब्रिटेन और अन्य देशों के उपग्रह भी थे। हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस कंपनी के सात उपग्रह भी इस मिशन में साथ थे, जो निजी क्षेत्र के लिए बड़ा अवसर था।
यह दूसरा लगातार मौका है जब PSLV के तीसरे चरण में समस्या आई है। पिछले साल (2025) में भी इसी चरण में गड़बड़ी के कारण एक मिशन असफल रहा था। उस समय बनी जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई थी। PSLV को भारत का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाता है और यह देश की व्यावसायिक अंतरिक्ष योजनाओं का आधार है। इस असफलता से इसरो के अलावा निजी कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को भी नुकसान हुआ है।
अभी तक इसरो ने आधिकारिक तौर पर मिशन को असफल घोषित नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उपग्रहों को सही कक्षा में पहुंचाने में सफलता नहीं मिली। इस घटना के बाद इसरो की टीम डेटा जांच कर रही है और जल्द ही पूरी जानकारी साझा करेगी।
ISRO का वर्कहॉर्स PSLV

ISRO के पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) को ‘वर्कहॉर्स’ की उपाधि क्यों दी जाती है? यह सवाल अंतरिक्ष प्रेमियों के मन में अक्सर उठता है। PSLV ISRO का सबसे विश्वसनीय और बहुमुखी लॉन्च व्हीकल है, जो 1993 से लगातार सफल मिशनों के जरिए भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
इसकी सफलता दर लगभग 94% है, और यह कम लागत में विभिन्न प्रकार के सैटेलाइट्स को सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित करने में माहिर है। PSLV ने न केवल भारतीय रिमोट सेंसिंग (IRS) सैटेलाइट्स लॉन्च किए, बल्कि 36 देशों के 345 से अधिक विदेशी सैटेलाइट्स को भी अंतरिक्ष में पहुंचाया है, जिससे भारत को वैश्विक राइडशेयर सेवाओं में अग्रणी बनाया। इसकी क्षमता ने ISRO को चंद्रयान-1, मंगलयान जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में सफलता दिलाई।
PSLV का सफर 1993 में शुरू हुआ, जब इसे IRS सैटेलाइट्स के लिए विकसित किया गया। पहला सफल लॉन्च PSLV-D2 था, जो 15 अक्टूबर 1994 को IRS-P2 को ऑर्बिट में ले गया। तब से यह ISRO का मुख्य आधार बना। 1999 में PSLV-C2 ने पहली बार विदेशी सैटेलाइट्स (किटसैट-3 और DLR-ट्यूबसैट) लॉन्च किए।
2008 में PSLV-C11 ने चंद्रयान-1 को चंद्रमा की ओर भेजा, जो भारत का पहला चंद्र मिशन था। 2013 में PSLV-C25 ने मंगल ऑर्बिटर मिशन (MOM) लॉन्च किया, जिसने भारत को पहले प्रयास में मंगल तक पहुंचाने वाला पहला एशियाई देश बनाया। 2015 में PSLV-C30 ने एस्ट्रोसैट, भारत का पहला स्पेस ऑब्जर्वेटरी, लॉन्च किया।
PSLV की सबसे बड़ी उपलब्धि 2017 में PSLV-C37 रही, जब इसने एक साथ 104 सैटेलाइट्स लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। हाल के वर्षों में, PSLV-C55 (2023) ने POEM प्लेटफॉर्म का उपयोग कर प्रयोग किए, जबकि PSLV-C56 ने सिंगापुर के DS-SAR सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
2024-25 में PSLV-XL और अन्य वैरिएंट्स ने IRNSS नेविगेशन सैटेलाइट्स और कमर्शियल पेलोड्स को ऑर्बिट में पहुंचाया।

