IPAC Ed Raid Mamata Banerjee Controversy SC ने दिया नोटिस

NFA@0298
5 Min Read


IPAC Ed Raid Mamata Banerjee Controversy : सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय की उस याचिका पर दिया गया है, जिसमें ईडी ने आरोप लगाया है कि IPAC के दफ्तर और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर छापे के दौरान राज्य सरकार और मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डाली।

क्या है पूरा मामला?

8 जनवरी 2026 को ईडी ने कोलकाता के साल्ट लेक इलाके में IPAC के दफ्तर और प्रतीक जैन के घर पर रेड मारी। यह छापा 2020 के कोयला तस्करी मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा थी। ईडी का कहना है कि छापे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं और पुलिस के साथ मिलकर कुछ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (जैसे लैपटॉप और फोन) अपने साथ ले गईं। ईडी ने इसे जांच में बाधा और सबूतों की चोरी बताया।

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है, बल्कि राज्य में केंद्रीय एजेंसियों की जांच में हस्तक्षेप का एक चौंकाने वाला पैटर्न दिख रहा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि मुख्यमंत्री और डीजीपी ने मौके पर धरना दिया और ईडी अधिकारियों को काम करने से रोका। उन्होंने डीजीपी राजीव कुमार और अन्य पुलिस अधिकारियों के निलंबन की मांग की। ईडी ने सीबीआई जांच और जब्त सामग्री लौटाने की भी मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने मामले को बहुत गंभीर बताया। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य की एजेंसियां केंद्रीय जांच में हस्तक्षेप करती रहीं, तो देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग सरकारें हैं लेकिन जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने देना जरूरी है।

कोर्ट ने फैसला सुनाया

-पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर पर रोक लगाई।
-राज्य सरकार को छापे वाली जगहों के सीसीटीवी कैमरे और आसपास के फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
-ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और अन्य को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा।
-अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी।

दोनों पक्षों की दलीलें

ईडी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने ईडी अधिकारी का फोन भी छीन लिया और जांच को रोकने की कोशिश की। यह केंद्रीय एजेंसियों के मनोबल को तोड़ने वाला कदम है। ममता बनर्जी की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मुख्यमंत्री पार्टी चेयरपर्सन के रूप में गईं, क्योंकि IPAC तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति संभालता है। उन्होंने सिर्फ एक लैपटॉप और आईफोन लिया जो पार्टी से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों से भरा था। सिब्बल ने छापेमारी के समय पर सवाल उठाया कि जांच 2024 से चल रही थी, तो चुनाव से ठीक पहले क्यों? उन्होंने ईडी के दावों को झूठा बताया और कहा कि पंचनामा में कोई बाधा नहीं दिखती।

राज्य सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ईडी ने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी अब सुप्रीम कोर्ट में क्यों? यह फोरम शॉपिंग है। उन्होंने कहा कि पुलिस को मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए साथ जाना जरूरी था।

IPAC तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति बनाने वाली कंपनी है, जिसने 2019 लोकसभा और 2021 विधानसभा चुनाव में पार्टी की मदद की। तृणमूल का कहना है कि ईडी छापेमारी से पार्टी की गोपनीय जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है खासकर 2026 विधानसभा चुनाव से पहले। ईडी का कहना है कि छापे कोयला घोटाले से जुड़ी है और राजनीति से कोई लेना-देना नहीं। यह मामला केंद्र-राज्य संबंधों, जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता और राजनीतिक हस्तक्षेप के बड़े सवाल उठा रहा है। कोर्ट अब इसकी जांच और तेज करेगा।



Source link

Share This Article
Leave a Comment