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लेंस न्यूज। Indore को देशभर में स्वच्छता मॉडल के रूप में पेश किया जाता है। लगातार कई वर्षों तक स्वच्छ सर्वेक्षण में नंबर-1 रहने वाले इस शहर की पहचान साफ सड़कों, कचरा प्रबंधन और नगर निगम की कार्यशैली से जुड़ी रही है। लेकिन अब इसी शहर को लेकर सामने आई एक वॉटर ऑडिट रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक ISO प्रमाणित लैब यूनिग्लोब एनालिटिका की जांच रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर शहर में सप्लाई हो रहा पानी बड़े पैमाने पर दूषित पाया गया है। रिपोर्ट का दावा है कि शहर के 98 प्रतिशत पानी के नमूने फेल पाए गए हैं और कई जगहों पर पानी ‘पीने योग्य’ नहीं है।

द लेंस के पास यह रिपोर्ट है, जिसे मध्यप्रदेश कांग्रेस के अपूर्वा भारद्वाज ने उपलब्ध कराई है।
रिपोर्ट के मुताबिक 3 फरवरी से 28 फरवरी 2026 के बीच ‘मोबाइल जल रथ’ के माध्यम से शहर के 7 विधानसभा क्षेत्रों के करीब 29 वार्डों से कुल 240 पानी के नमूने लिए गए। इन नमूनों की जांच ISO प्रमाणित लैब में करवाई गई।
जांच रिपोर्ट में 98 प्रतिशत नमूनों को ‘डेंजरसली सबस्टैंडर्ड’ यानी कि यानी ‘खतरनाक रूप से घटिया’ श्रेणी में रखा गया। रिपोर्ट में सबसे गंभीर खुलासा पानी में ई-कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी को लेकर हुआ है।
ई-कोलाई बैक्टीरिया आमतौर पर मल-मूत्र और सीवेज संक्रमण से जुड़ा माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका मतलब है कि कई जगहों पर पेयजल में सीवेज का मिश्रण हो सकता है। व्यक्तिगत टेस्ट रिपोर्ट्स में भी इसकी पुष्टि होने का दावा किया गया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस रिपोर्ट के आधार पर भाजपा सरकार और नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा बार-बार यह दलील देती रही कि केंद्र, राज्य और नगर निगम में एक ही दल की सरकार होने से शहर के विकास में धन की कमी नहीं होगी, योजनाओं को शीघ्र स्वीकृति मिलेगी और जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन इंदौर की स्थिति इसके ठीक विपरीत है।
उन्होंने कहा कि इंदौर ने भाजपा को 9 विधायक दिए, जिनमें दो कैबिनेट मंत्री नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट शामिल हैं। इसके अलावा सांसद, महापौर और पूरी नगर निगम परिषद भाजपा के पास है, फिर भी आज पूरा शहर भीषण जल संकट, दूषित पेयजल और अव्यवस्थित विकास का दंश झेल रहा है।
पटवारी का दावा है कि इंदौर का लगभग 90 प्रतिशत पानी दूषित हो चुका है और लोग ‘जहरीला पानी’ पीने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस पूरी रिपोर्ट को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट को पूरे शहर का दोबारा स्वतंत्र वाटर ऑडिट कराने की मांग करेगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पानी में कैल्शियम, क्लोराइड और सल्फेट जैसे रसायनों का स्तर अनुमेय सीमा से कई गुना ज्यादा पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक ऐसे पानी का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दूषित पानी के सेवन से हैजा, टाइफाइड, पीलिया, डायरिया, पेचिश और गंभीर संक्रमण जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। गंभीर मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार शहर की पुरानी और लीकेज वाली पाइपलाइनें इस संकट की बड़ी वजह हो सकती हैं।
कई इलाकों में सीवेज लाइन और पानी की पाइपलाइन एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। जहां पाइपलाइन में लीकेज होता है, वहां गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुदामा नगर, विकास नगर, नया बसेरा, चौहान नगर, राज मोहल्ला और खंडेल पुरा जैसे बड़े रिहायशी इलाके इस संकट की चपेट में हैं।
सुदामा नगर सेक्टर-डी और सेक्टर-ए के कई नमूने फेल पाए गए। वार्ड-46 विकास नगर के लगभग सभी सैंपल पीने योग्य नहीं बताए गए। यहां तक कि सरकारी अस्पताल के आसपास के नमूनों में भी खराब जल गुणवत्ता दर्ज की गई।
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