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नई दिल्ली। Congress ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के ताजा दावे के बाद पीएम नरेंद्र मोदी से पांच सवाल पूछे हैं। गौरतलब है कि रूबियो ने अमेरिका से भारत के द्वारा 500 अरब डॉलर की खरीदी का समझौता होने की बात कही थी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि 10 मई 2025 को भारतीय समयानुसार शाम 5:37 बजे अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सबसे पहले युद्धविराम की घोषणा की थी, जिससे ऑपरेशन सिंदूर अप्रत्याशित रूप से रुक गया। उन्होंने दावा किया था कि राष्ट्रपति ट्रंप के हस्तक्षेप के कारण ही यह युद्धविराम संभव हो पाया।
जयराम ने क्या कि 21 मई 2026 को मार्को रुबियो फिर सबसे पहले यह घोषणा करने वाले व्यक्ति बने कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति अगले सप्ताह भारत यात्रा पर आएंगे। यह तब हुआ, जब भारत और वेनेजुएला ने स्वयं इस खबर का संकेत तक नहीं दिया था या इसकी पुष्टि नहीं की थी।
उन्होंने कहा आज मार्को रुबियो ने एक बार फिर X पर बयान देकर देश को चौंका दिया है। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार ने अगले पांच वर्षों में ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
जयराम रमेश का कहना था कि वित्तीय वर्ष 26 तक भारत का वार्षिक आयात 52.9 अरब डॉलर है-विदेश मंत्री रुबियो के बयान का अर्थ है कि भारत को अमेरिका से अपना वार्षिक आयात दोगुना करना पड़ेगा।
जयराम रमेश का कहना है कि इस चिंताजनक नए घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री से हमारे पांच सीधे सवाल हैं।
पहला सवाल: मलेशिया जैसे देशों ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद अमेरिका के साथ हुए अपने व्यापार समझौतों को ‘null and void’ घोषित कर दिया है, जिसमें ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया गया था और जिनके आधार पर ये समझौते हुए थे। संसद में @RahulGandhi के खुलासे के दबाव में प्रधानमंत्री ने जल्दबाजी में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें मोदी सरकार ने एकतरफा तरीके से भारी रियायतें दे दीं, जो हमारे किसानों और उद्योगों के लिए खतरा हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस समझौते का तर्क ही ध्वस्त हो चुका है। फिर मोदी सरकार ने इस जनविरोधी और खतरनाक व्यापार समझौते को इसी तरह निरस्त करने का साहस क्यों नहीं दिखाया?
दूसरा सवाल: प्रधानमंत्री स्वयं लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए घरेलू ईंधन खपत और विदेश यात्राएं कम करने की अपील कर चुके हैं। फिर उसी समय मोदी सरकार ने अमेरिका से रिकॉर्ड आयात पर सहमति क्यों दी?
तीसरा सवाल: पिछले 12 महीनों में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी 12% कीमत खो चुका है। क्या अमेरिका से आयात में यह भारी वृद्धि रुपये की गिरावट को और तेज नहीं करेगी?
चौथा सवाल: पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन ने सौर ऊर्जा घोटाले में गौतम अदानी के खिलाफ आपराधिक धोखाधड़ी के आरोप खारिज कर दिए, जिसमें कथित तौर पर 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत दी गई थी। क्या आयात के मुद्दे पर अमेरिका के सामने पीएम मोदी का समर्पण, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा मोदानी साम्राज्य को दी गई राहत से जुड़ा हुआ है?
पांचवां सवाल: ऑपरेशन सिंदूर के युद्धविराम और रूसी तेल-गैस आयात रोकने से लेकर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और वेनेजुएला के राष्ट्रपति की यात्रा तक -भारतीय विदेश नीति से जुड़ी हर जानकारी अब नई दिल्ली के बजाय सबसे पहले वॉशिंगटन DC से क्यों आ रही है?
प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने भारत की संप्रभु विदेश नीति को भारतीय जनता और दुनिया के सामने रखने की अपनी जिम्मेदारी क्यों छोड़ दी है?
ऐसा लग रहा है कि कंप्रोमाइज्ड पीएम अपने करीबी मित्र को तुष्ट और खुश करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
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