CM Vishnu Deo Sai का बड़ा बयान- जरूरत पड़ी तो संशोधन करेंगे

NFA@0298
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रायपुर। जमीन की नई कलेक्टर गाइडलाइन दरों के कारण पूरे छत्तीसगढ़ में मचे बवाल के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चुप्पी तोड़ी है। जमीन की दरों में भारी बढ़ोत्तरी से भड़के विरोध को देखते हुए सीएम साय ने साफ कहा कि सरकार लोगों की परेशानी समझती है। जरूरत पड़ी तो गाइडलाइन दरों में संशोधन से पीछे नहीं हटेंगे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इस संबंध में यह बातें कहीं।

सीएम साय के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े हर वर्ग में हलचल तेज हो गई है। सीएम साय ने माना कि गाइडलाइन का मुद्दा अब प्रदेशव्यापी बहस का विषय बन चुका है।

उन्होंने गाइडलाइन दरों में बढ़ोत्तरी को सही बताते हुए कहा कि 2017 के बाद पहली बार गाइडलाइन दरों में बड़ा संशोधन किया गया है। नियमों के मुताबिक हर साल रिव्यू होना चाहिए था, लेकिन कई सालों से यह लंबित था। कुछ पॉजिटिव पहलू हैं, लेकिन जनता तक सही जानकारी नहीं पहुंच पाई है।

 उन्होंने यह भी जोड़ा यदि दरों से जनता को दिक्कत है तो सरकार राहत देने के विकल्पों पर विचार करेगी। सरकार के इस संकेत को कई राजनीतिक विश्लेषक संशोधन का शुरुआती इशारा मान रहे हैं।

100  से लेकर 800 फीसदी तक बढ़ोतरी

प्रदेश में गाइडलाइन दरों के खिलाफ हर मोर्चे से आवाजें उठ रही हैं। जानकारी के अनुसार कुछ जिलों में दरें 100% तक बढ़ाई गईं। जबकि कई इलाकों में यह उछाल 800% तक पहुंच गया। अचानक हुई इस भारी बढ़ोतरी से आम लोग, व्यापारी, रियल एस्टेट सेक्टर और किसान सब खुलकर विरोध कर रहे हैं।

कई जिलों में व्यापारिक गतिविधियां तक ठप हो गईं और जमीन खरीद-बिक्री का काम लगभग रुक गया है।

यह मुद्दा इतना गर्म है कि सत्ता पक्ष के भीतर भी मतभेद सामने आने लगे हैं। भाजपा नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सीएम विष्णुदेव साय को चिट्ठी लिखकर गाइडलाइन वृद्धि को अव्यावहारिक और जनता पर अतिरिक्त बोझ बताया था। उन्होंने इसे तत्काल वापस लेने की मांग भी की।

इससे साफ है कि गाइडलाइन का असर सिर्फ जनता पर नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरणों पर भी गहरा पड़ रहा है।

प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शनों और जनप्रतिनिधियों की खुलेआम आपत्तियों के बीच, अब उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार आगामी दिनों में राहत भरा फैसला ले सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि गाइडलाइन में संशोधन नहीं हुआ तो रियल एस्टेट बाजार ठप हो सकता है। वहीं, जमीन खरीदी पर भारी असर पड़ेगा, जिससे सरकार की छवि पर भी सीधी चोट लगेगी।

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