नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत (CJI Surya Kant) ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में छह एकीकृत न्यायालय परिसरों की आधारशिला रखी और कहा कि ये परिसर पूरे देश में सुविधाओं के लिए मानक बनेंगे।
मुख्य न्यायाधीश ने चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया में एकीकृत न्यायालय परिसरों की नींव रखी और भूमि पूजन समारोह संपन्न किया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित कुल 10 परिसरों में से ये परिसर शामिल हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ये परिसर देश के लिए मिसाल बनेंगे। मैं जिस भी राज्य में जाऊंगा, वहां उत्तर प्रदेश सरकार का उदाहरण दूंगा। मैं राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों से अपील करूंगा कि वहां भी ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने अपने भाषण में मुख्यमंत्री की इस कार्य के लिए प्रशंसा की
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि देश का यह क्षेत्र कई ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है, अब मुख्यमंत्री ने यहां न्यायिक मंदिर स्थापित करके उस इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
उन्होंने कहा कि एकीकृत न्यायिक न्यायालय परिसर अगले 50 वर्षों की कानूनी आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूरा करेगा। इस परिसर में अधिवक्ताओं और आम जनता के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाएं सराहनीय हैं।
उन्होंने आगे कहा कि न्यायालय परिसर न्याय का मंदिर सिद्ध होगा। यहां बैठकर न्यायिक अधिकारी मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए शिकायतकर्ताओं को न्याय दिलाएंगे। बार एसोसिएशन के सदस्य भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
मुख्य न्यायाधीश ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से जिला न्यायालयों में वकालत करने वाली महिलाओं के लिए अलग बार रूम बनाने का आह्वान किया। चंदौली में किए गए इंतजामों की सराहना करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से परिसर में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने का आग्रह किया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘इससे बुजुर्गों और मुक़दमेबाज़ों को राहत मिलेगी।’
आधारशिला रखने और भूमि पूजन कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंजलि, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
इससे पहले, अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि न्यायपालिका को भी समान रूप से सशक्त बनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि आम आदमी को न्याय दिलाने के लिए बुनियादी ढांचा इतना सुविधाजनक और सरल होना आवश्यक है। जब भी न्यायिक व्यवस्था से संबंधित कोई कार्य उत्तर प्रदेश सरकार के पास आता है, तो उसे पूरा करने में देर नहीं लगती। हमारा मानना है कि सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए न्यायिक सुविधाओं को मजबूत करने में कोई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और उत्तर प्रदेश इस दिशा में पहले ही काफी प्रगति कर चुका है।

