लेंस डेस्क।अपनी दो शिष्याओं से बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा काट रहा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह (Baba Ram Rahim) सोमवार को रोहतक की सुनारिया जेल से 40 दिन की पैरोल पर बाहर आ गया। 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद यह राम रहीम की 15वीं पैरोल है।
डेरा प्रमुख को वर्ष 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, वह एक पत्रकार की हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया जा चुका है, जिसमें 2019 में उसे सह-आरोपियों के साथ सजा सुनाई गई थी।
डेरा सच्चा सौदा के प्रवक्ता और वकील जितेंद्र खुराना ने बताया कि पैरोल की अवधि के दौरान राम रहीम सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में ही रहेगा।
इससे पहले अगस्त 2025 में उसे 40 दिन की पैरोल, अप्रैल 2025 में 21 दिन की फरलो, जनवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले 30 दिन की पैरोल, अक्टूबर 2024 में हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 20 दिन की पैरोल और अगस्त 2024 में 21 दिन की फरलो दी जा चुकी है।
इसके अलावा, 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भी उसे तीन सप्ताह की फरलो मिली थी।
मई 2024 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा के पूर्व मैनेजर रणजीत सिंह की 2002 में हुई हत्या के मामले में जांच को कमजोर बताते हुए राम रहीम और चार अन्य को बरी कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को पलट दिया था।
डेरा सच्चा सौदा के हरियाणा, पंजाब, राजस्थान सहित कई राज्यों में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, कैथल, कुरुक्षेत्र और हिसार जैसे जिलों में डेरा का खासा प्रभाव माना जाता है। इससे पहले भी कई बार पैरोल के दौरान राम रहीम उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित डेरा आश्रम में रह चुका है।
उमर खालिद-शरजील इमाम का हवाला देकर विपक्ष का हमला
राम रहीम को बार-बार मिल रही पैरोल को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी नेताओं ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को अब तक जमानत न मिलने पर सवाल उठाए हैं।
सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने X पर लिखा, ‘जमानत नियम है, जेल अपवाद’ का सिद्धांत कुछ खास लोगों पर लागू नहीं होता। उमर खालिद को यूएपीए के तहत पांच साल से ज्यादा समय से जेल में रखा गया है, जबकि मुकदमा अभी शुरू भी नहीं हुआ। वहीं, बलात्कार के दोषी गुरमीत राम रहीम को सजा के बाद 15वीं बार जेल से बाहर आने का मौका दिया गया है।’
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) समेत कई सिख संगठनों ने भी राम रहीम को बार-बार राहत दिए जाने की आलोचना की है। संगठनों का कहना है कि इससे न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं और पीड़ितों को गलत संदेश जाता है।
यह भी पढ़ें : दिल्ली दंगों में उमर खालिद और शरजील की जमानत खारिज, पांच को मिली जमानत

