- स्टॉक ब्रोंकिग की चार कंपनियों से जुड़े रहे हैं गुरु घासीदास युनिवर्सिटी के वीसी
- पीएमओ ने लिया है आलोक चक्रवाल के फर्जीवाड़े का संज्ञान
- सीबीआई जांच में घिरे नमो स्टडीज से जुड़ा पूर्व गवर्नर का नाम
- प्रमोशन के लिए छिपा लीं शेयर दलाली की बातें
नई दिल्ली। यह खबर चौंकाने वाली है मगर सच है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति आलोक चक्रवाल (aalok chakrawal )पहले शेयर दलाल थे। द लेंस के इन्वेस्टिगेशन में जानकारी मिली है कि आलोक चक्रवाल पूर्व में SKSE सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक थे। इसके अलावा आलोक चक्रवाल कई अन्य कई कंपनियों में बतौर निदेशक कार्यरत रहे हैं। दिलचस्प यह है कि SKSE सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड इनके निदेशक रहते तमाम तरह की गड़बड़ियों और कदाचार को लेकर सेबी के द्वारा तमाम तरह की कार्रवाइयों से जूझती रही है।
पीएमओ को पत्र
किन किन कंपनियों से जुड़े वीसी
सिद्धि विनायक स्टॉक ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड, SKSE सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड इनोवेट वर्ल्डवाइड आईटी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, इंटरकनेक्टेड इंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड यह वो कम्पनियाँ हैं जिनमे पिछले 20 वर्षों के दौरान अलग अलग वक्त में आलोक चक्रवाल बतौर निदेशक जुड़े रहे लेकिन अपने प्रमोशन के दस्तावेजों में उसका कहीं कोई जिक्र नहीं किया SKSE सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड हाल के दिनों में सेबी के द्वारा की गई कार्रवाइयों से जूझ रही है जिसमे उस पर पेनाल्टी लगाए जाने का भी एक प्रकरण शामिल है। यह किन किन कंपनियों से कब कब जुड़े रहे इसके दस्तावेज लेंस के पास मौजूद हैं।

सौराष्ट्र विश्वविद्यालय में एक दिन नहीं ली कक्षा
आलोक चक्रवाल गुरु घासीदास से पहले जिस सौराष्ट्र विश्वविद्यालय में कार्यरत थे। मनोज रूपड़ा प्रकरण सामने आने के बाद उस विश्वविद्यालय के पूर्व सिंडिकेट सदस्य डॉ धर्म काम्बलिया ने द लेंस से संपर्क साधा है। उन्होंने जो जानकारी दी है वह हैरत में डालती है। पीएमओ में प्रेषित उनकी एक शिकायत लंबित है जिसके दस्तावेज लेंस के पास हैं और जिसपर कभी भी कार्रवाई हो सकती है। डॉ धर्म काम्बलिया ने जानकारी दी है कि आलोक चक्रवाल ने एसोसिएट प्रोफ़ेसर से प्रोफ़ेसर के पद पर प्रमोशन के लिए सीएएस में अपने अनुभव को लेकर झूठ बोला है और अपनी अकादमिक अनुभव को छिपाते हुए प्रोफ़ेसर का पद हासिल कर लिया। द लेंस को जानकारी मिली है आलोक चक्रवाल अपने कार्यकाल में SKSE सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड समेत कई कंपनियों में बतौर निदेशक जुड़े हुए थे जिसका जिक्र उन्होंने अपने प्रमोशन फ़ार्म में छिपाकर बतौर शैक्षणिक अनुभव अंकित कर दिया जिसके बाद सौराष्ट विश्वविद्यालय हरकत में आया। सीएएस के फ़ार्म में आलोक चक्रवाल द्वारा बोले गए झूठ के दस्तावेज भी द लेंस के पास मौजूद हैं।

१५ सालों में एक दिन भी नहीं ली कक्षा
धर्म काम्बलिया ने जानकारी दी है कि आलोक चक्रवाल ने अपनी पत्नी नीलांबरी दवे को भी बिना योग्यता के सौराष्ट्र विश्वविद्यालय में कार्यवाहक कुलपति का पद दिला दिया। ग़जब यह रहा कि सौराष्ट्र विश्वविद्यालय में अपने कार्यकाल के दौरान १५ वर्षों तक कुलपति आलोक चक्रवाल ने एक दिन भी कोई कक्षा नहीं ली।

अयोग्यता के बावजूद बने कुलपति
जिस वक्त केंद्र सरकार द्वारा आलोक चक्रवाल को बिलासपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति घोषित किया गया वो यूजीसी द्वारा वाइसचांसलर पद की योग्यता को पूरा नहीं करते थे। उन्होंने ही सेंटर फॉर नरेंद्र मोदी स्टडीज के फर्जीवाड़े में वहां के प्रोफेसर्स को भी शामिल कर लिया। प्रोफ़ेसर संदीप कुमार पाधी को नमो स्टडीज और विश्वविद्यालय के बीच हुए समझौते के तहत नोडल ऑफिसर बनाया गया जिनका काम दोनों संस्थाओं के बीच समन्वय करके छात्रों को रिसर्च कराना था। जब प्रोफ़ेसर संदीप पाधी से पूछा गया कि कितने छात्रों को फर्जीवाड़े के आरोपों में घिरी और सीबीआई के हत्थे चढ़ी इस संस्था से रिसर्च कराया गया उन्होंने जवाब देने से इंकार कर दिया। ग़जब यह रहा कि नमो स्टडीज से जुड़े जसीम मोहम्मद ने छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल बिसवाभूषण हरिचंदन को अपने सेंटर के एडवायजरी काउंसिल का चेयरमैन बना दिया।

लगातार मीटिंग कर रहे आलोक चक्रवाल
इस संबंध में जब आलोक चक्रवाल को फोन किया गया तो उनके सेक्रेटरी ने उठाया जिनका कहना था कि कुलपति महोदय लगातार व्यस्तता की वजह से फोन नहीं उठा रहे हैं। सेक्रेटरी का कहना था कि कुलपति आलोक चक्रवाल लगातार बैठक कर रहे हैं, यह रात 10 बजे का वक्त था। जैसे ही उनका जवाब मिलेगा हम खबर को अपडेट करेंगे।

