Supreme Court- RTI कार्यकर्ता होने को बताया नया बिजनेस मॉडल

NFA@0298
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज एक आरटीआई कार्यकर्ता को सड़क निर्माण से जुड़े मामले में लोक सेवक को बाधित करने के आरोप में अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने आरटीआई कार्यकर्ता राकेश कुमार बहल को जमानत देने से इंकार करते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी की कि आरटीआई एक्टिविज्म नया बिजनेस बन गया है। गौरतलब है कि इसके पहले सीजेआई में युवाओं को काकरोच कह था।

लाइव लॉ के अनुसार जस्टिस संदीप मेहता ने कहा ‘आरटीआई कार्यकर्ता नया बिजनेस मॉडल बन गए हैं। केंद्र सरकार ने फंड जारी कर दिया है, सड़क का निर्माण वह देख लेगी। आप कौन हैं? कथित आरटीआई कार्यकर्ता! पीत पत्रकारिता कर रहे हैं। खारिज।’

जस्टिस बिश्नोई ने भी पूछा कि बहल सड़क निर्माण की निगरानी क्यों कर रहे थे। उन्होंने टिप्पणी की: “आप कौन हैं जो इन सड़कों के निर्माण की प्रगति या सब कुछ की निगरानी कर रहे हैं? क्या आप कोई उच्च अधिकारी हैं?”याचिकाकर्ता ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के अग्रिम जमानत खारिज करने वाले आदेश को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता और एक अन्य आरोपी ने कथित तौर पर चल रहे सड़क निर्माण कार्य में बाधा डाली। उन्होंने कार्य की निगरानी कर रहे शिकायतकर्ता और साइट पर मौजूद मजदूरों को धमकी दी। यह भी आरोप है कि उन्होंने मजदूरों के खिलाफ जाति आधारित अपमानजनक टिप्पणियां कीं।

इसके बाद बीएनएस 2023 की धाराओं 304(2), 132, 221, 121(1), 351(2), 351(3) (बीएनएस 2023 की धाराएं 3(5), 121(2) और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप सरकारी कार्य में बाधा डालने में याचिकाकर्ता की प्रत्यक्ष और विशिष्ट संलिप्तता दर्शाते हैं।



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