Rajesh Exports ने कर दिया 15 लाख करोड़ का गोल्ड घोटाला, सेबी का आरोप

NFA@0298
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नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनरी कंपनी की मालिक भारतीय कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (Rajesh Exports) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। खबर है कि कंपनी ने 15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का हेरफेर किया है। कंपनी पर वित्तीय आंकड़ों में कथित हेरफेर, फंड के गलत इस्तेमाल और निवेशकों को भ्रामक जानकारी देने जैसे आरोप लगे हैं।

मार्केट रेगुलेटर SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) और उसके चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम एकतरफा आदेश पारित किया है।यह आदेश एक चल रही जांच के दौरान वित्तीय गलतबयानी, फंड-रूटिंग में अनियमितताओं और सहयोग न करने के शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर दिया गया है।

SEBI ने अंतरिम आदेश में आरोप लगाया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के कुल रेवेन्यू के बारे में गलत जानकारी दी, जो कुल राजस्व का 99.80 प्रतिशत है।  

राजेश मेहता स्विट्जरलैंड स्थित  अपनी गोल्ड रिफाइनरी के कारण चर्चा में रहा है। जिसका अधिग्रहण कंपनी ने वर्ष 2015 में लगभग 400 मिलियन डॉलर में किया था। लेकिन अब कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

109 पन्नों के आदेश में सेबी ने कहा है कि कंपनी ने कई वर्षों तक गैर-प्रामाणिक लेनदेन दर्ज किए, खातों के समेकन में गलत तरीके अपनाए और संबंधित पक्षों से जुड़े लेनदेन की पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के कुछ फंड कथित तौर पर राजेश मेहता और सिद्धार्थ मेहता के व्यक्तिगत बैंक खातों के माध्यम से भेजे गए, जबकि इसके लिए आवश्यक मंजूरी और खुलासा नहीं किया गया।

सेबी ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी ने हजारों करोड़ रुपये के कुछ डेरिवेटिव सौदों को अपने कारोबार की आय के रूप में दर्ज किया। इसके अलावा विदेशी मुद्रा उतार-चढ़ाव और निवेश से मिलने वाली ब्याज आय को भी परिचालन आय के रूप में दिखाया गया। इससे कंपनी के कारोबार का आकार वास्तविकता से कहीं बड़ा नजर आया।

जांच के दौरान कंपनी द्वारा अफ्रीका में सोने की खदानों में निवेश का दावा भी किया गया था। हालांकि सेबी को उपलब्ध दस्तावेजों में इस दावे की पुष्टि नहीं मिली।

नियामक ने इस दावे पर भी सवाल उठाए हैं। सेबी ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान कंपनी ने कई जरूरी जानकारियां उपलब्ध नहीं कराईं और अलग-अलग समय पर विरोधाभासी जवाब दिए। इसे जांच में सहयोग न करने की श्रेणी में माना गया है।



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