46 डिग्री की जानलेवा धूप में 158 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं

NFA@0298
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46 डिग्री की जानलेवा धूप में 158 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं


30-May-2026 10:07 PM

2300 डीएड अभ्यर्थी, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार मौन

रायपुर, 30 मई। तूता धरना स्थल पर अपनी जायज मांगों को लेकर बैठे 2300 डीएड अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन आज 158वें दिन भी जारी रहा। राजधानी में पारा 46 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है, लेकिन इस जानलेवा और तपती धूप में भी छत्तीसगढ़ के ये शिक्षित बेरोजगार युवा अपने हक की ‘सहायक शिक्षक’ पद पर नियुक्ति के लिए डटे हुए हैं। संवेदनहीनता का आलम यह है कि शासन-प्रशासन की ओर से अब तक इन युवाओं की सुध लेने कोई नहीं पहुंचा है।


संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि  उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए साफ तौर पर 2 महीने के भीतर उचित निर्णय लेकर पात्र डीएड अभ्यर्थियों को तत्काल नियुक्ति देने का आदेश जारी किया था। कोर्ट की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी आज पर्यंत तक विभाग और सरकार द्वारा इन युवाओं को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया है, जो कि सीधे तौर पर न्यायपालिका के आदेशों की अवहेलना है।

अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा युवा:

इस कड़कड़ाती धूप और मानसिक प्रताड़ना के कारण आंदोलनरत युवाओं का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है। इसी क्रम में एक आंदोलनकारी डीएड अभ्यर्थी शैलेंद्र साहू की हालत इतनी बिगड़ गई कि वे पिछले 2 महीनों से रायपुर के बालाजी हॉस्पिटल में गंभीर अवस्था में भर्ती हैं और अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। अभ्यर्थियों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा, “क्या सरकार किसी की जान जाने का इंतजार कर रही है? हमारे एक साथी अस्पताल में हैं और बाकी साथी यहां धूप में तप रहे हैं, लेकिन शासन की नींद नहीं टूट रही।”

शिक्षा मंत्री का आश्वासन निकला खोखला:

अभ्यर्थियों ने बताया कि कुछ समय पूर्व शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस संवेदनशील मुद्दे पर ‘बीच का रास्ता’ निकालकर जल्द समाधान करने का लिखित/मौखिक आश्वासन दिया था। परंतु, हफ्तों बीत जाने के बाद भी आज तक सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी या मंत्री अनशन स्थल पर अभ्यर्थियों का हाल जानने आया।

डीएड अभ्यर्थियों की चेतावनी:

तपती धूप में अपने जीवन को दांव पर लगा चुके अभ्यर्थियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक  2300 पदों पर सहायक शिक्षक की नियुक्ति का आदेश जारी नहीं हो जाता, यह आमरण अनशन समाप्त नहीं होगा। यदि इस दौरान किसी भी अभ्यर्थी को कुछ भी होता है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ शासन और शिक्षा विभाग की होगी।



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