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Jhiram Ghati Naxal Attack : 13 साल का इंतजार खत्म! झीरम घाटी

By NS
On: September 5, 2026 8:21 AM
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रायपुर। Jhiram Ghati Naxal Attack : झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े करीब 13 साल पुराने मामले में आज 5 सितंबर 2026 को बड़ा अपडेट सामने आ सकता है। NIA की विशेष अदालत इस मामले में फैसला सुना सकती है। कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी, लेकिन इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। ऐसे में अब 10 आरोपियों को लेकर अदालत के निर्णय का इंतजार है। फैसले को लेकर झीरम हमले में मारे गए नेताओं के परिजनों के साथ ही पूरे छत्तीसगढ़ की नजर अदालत पर टिकी हुई है।

25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला

झीरम घाटी हमले की घटना 25 मई 2013 की है। उस समय विधानसभा चुनाव नजदीक थे और कांग्रेस की ओर से तत्कालीन भाजपा सरकार के खिलाफ परिवर्तन यात्रा निकाली जा रही थी। सुकमा में कार्यक्रम खत्म होने के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला जगदलपुर की ओर रवाना हुआ था।

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बताया जाता है कि काफिले में करीब 25 वाहन और लगभग 200 लोग शामिल थे। इसमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी पहुंचा, जहां नक्सलियों ने सड़क पर पेड़ गिराकर रास्ता रोक दिया और इसके बाद हमला शुरू कर दिया।

करीब डेढ़ घंटे तक चली गोलीबारी

काफिला रुकते ही जंगल और पहाड़ियों की ओर से हथियारबंद नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। हमले में कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की जान चली गई। नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा समेत कई लोग इस हमले में मारे गए। करीब डेढ़ घंटे तक इलाके में गोलीबारी और हिंसा का माहौल रहा।

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घटना के बाद झीरम घाटी हमला देशभर में चर्चा का विषय बना और इसकी जांच को लेकर कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू हुई।

NIA ने की मामले की जांच

हमले के बाद राज्य पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू की। बाद में मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA के पास पहुंचा। जांच में हमले में शामिल लोगों के साथ-साथ इसके पीछे की कथित साजिश और अन्य पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा गया।

हालांकि, मामले की जांच को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कई मौकों पर आरोप लगाया कि कुछ महत्वपूर्ण गवाहों और व्यक्तियों से पूछताछ नहीं की गई।

SIT और NIA की जांच को लेकर भी विवाद

झीरम मामले की जांच को लेकर राज्य सरकार की SIT और NIA के बीच भी कानूनी व राजनीतिक विवाद सामने आए। भूपेश बघेल का कहना है कि उनकी सरकार के दौरान झीरम मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई थी। उनका दावा है कि NIA ने इस जांच को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

बघेल ने यह भी कहा है कि केंद्र से मामले की जांच राज्य सरकार को सौंपने की मांग की गई थी। हालांकि, जांच से जुड़े इन दावों और आरोपों का अंतिम मूल्यांकन अदालत के रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

10 अगस्त को पूरी हुई अंतिम बहस

मामले में लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद 10 अगस्त 2026 को NIA की विशेष अदालत में अंतिम बहस पूरी हुई। अभियोजन पक्ष ने अपने पक्ष में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोप साबित होने की दलील दी, जबकि बचाव पक्ष ने अभियोजन के दावों और साक्ष्यों पर सवाल उठाए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

31 अगस्त को नहीं आया फैसला

अंतिम बहस के बाद 31 अगस्त को फैसले की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन उस दिन निर्णय नहीं आया। इसके बाद 5 सितंबर की तारीख सामने आई। अब आज अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

10 आरोपियों पर आएगा निर्णय

इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। अब 10 आरोपियों के खिलाफ अदालत का फैसला आना है। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज पेश किए गए हैं।

अदालत इन गवाहियों, दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आरोपियों की भूमिका को लेकर अपना निर्णय सुनाएगी।

फैसले से पहले जांच पर फिर उठे सवाल

फैसले से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बार फिर झीरम मामले की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि हमले के पीछे मौजूद कथित षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने के लिए जांच में पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।

वहीं, अदालत का फैसला अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत रिकॉर्ड, गवाहियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

13 साल बाद अहम पड़ाव पर झीरम मामला

25 मई 2013 की घटना ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा असर डाला था। करीब 13 साल बाद यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। आज आने वाला फैसला आरोपियों की भूमिका को लेकर अदालत के निष्कर्ष सामने रखेगा। हालांकि, झीरम हमले की कथित साजिश और जांच से जुड़े राजनीतिक सवाल फैसले के बाद भी चर्चा में बने रहने की संभावना है।



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