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CG NEWS: फॉगिंग पर हर महीने लाखों का खर्च, फिर भी मच्छरों

By NS
On: August 13, 2026 12:10 PM
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बिलासपुर। CG NEWS: बारिश शुरू होते ही शहर में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। डेंगू, मलेरिया और वायरल बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है, लेकिन नगर निगम की फॉगिंग व्यवस्था सवालों के घेरे में है। निगम का दावा है कि सभी वार्डों में नियमित रूप से फॉगिंग और लार्वा नाशक का छिड़काव किया जा रहा है, जबकि कई वार्डों के लोगों का कहना है कि महीनों से फॉगिंग मशीन नजर ही नहीं आई। ऐसे में हर महीने लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखाई दे रही है।

बारिश का मौसम शुरू होते ही शहर में मच्छरों का आतंक बढ़ गया है। शाम होते ही अधिकांश वार्डों में मच्छरों का प्रकोप लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। डेंगू, मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों की आशंका के बीच नगर निगम की फॉगिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।नगर निगम का दावा है कि पूरे शहर में नियमित रूप से फॉगिंग मशीन के माध्यम से दवा का छिड़काव और लार्वा नियंत्रण का कार्य किया जा रहा है।

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निगम के अनुसार फॉगिंग के लिए प्रतिदिन लगभग 200 लीटर डीजल उपलब्ध कराया जाता है, जिस पर करीब 20 हजार रुपये प्रतिदिन खर्च होते हैं। इस हिसाब से हर महीने लगभग 6 लाख रुपये केवल डीजल पर खर्च किए जाते हैं। इसके अलावा लार्वा नाशक दवा और कर्मचारियों पर होने वाला खर्च जोड़ दें तो यह राशि करीब साढ़े आठ लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाती है। यानी सालभर में लगभग एक करोड़ रुपये मच्छरों की रोकथाम पर खर्च किए जाते हैं।

इसके बावजूद शहर के कई वार्डों के रहवासियों का कहना है कि महीनों से उनके क्षेत्र में फॉगिंग मशीन नहीं पहुंची है। इसे लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि जब इतना बड़ा बजट खर्च किया जा रहा है, तब भी लोग मच्छरों से परेशान हैं तो यह निगम की नाकामी है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर खर्च और फॉगिंग कार्य का सार्वजनिक ब्यौरा जारी करने की मांग की है।

वहीं नगर निगम के अपर आयुक्त का कहना है कि शहर के सभी वार्डों में नियमित फॉगिंग कराई जा रही है। इसकी मॉनिटरिंग की जाती है और पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज रहता है। हालांकि, जमीनी स्तर पर फॉगिंग नजर नहीं आने से निगम के दावों पर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। ऐसे में अब यह मांग उठने लगी है कि फॉगिंग व्यवस्था का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि करोड़ों रुपये का खर्च वास्तव में शहरवासियों को राहत दिला भी रहा है या नहीं।



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