प्रार्थना के लिए स्कूल प्रांगण में मौजूद थे बच्चे, उसी दौरान कमरे की छत का प्लास्टर गिरा; जर्जर भवन को डिस्मेंटल कर नए भवन की मांग लंबे समय से लंबित
पाटन। मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम सोनपुर के शासकीय मिडिल एवं प्राथमिक स्कूल भवन की जर्जर स्थिति अब विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गई है। मंगलवार 11 अगस्त को उस समय बड़ा हादसा टल गया, जब मिडिल स्कूल के एक कमरे की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि घटना के समय स्कूल के बच्चे कमरे के अंदर नहीं थे, बल्कि स्कूल प्रांगण में प्रार्थना के लिए एकत्रित थे। इससे किसी भी बच्चे को चोट नहीं आई और एक बड़ा हादसा होने से टल गया।

प्रार्थना के दौरान गिरा छत का मलबाप्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह स्कूल में बच्चे प्रार्थना के लिए स्कूल प्रांगण में एकत्रित हुए थे। इसी दौरान स्कूल भवन के एक कमरे की छत का प्लास्टर अचानक टूटकर नीचे गिर गया। छत का मलबा गिरने की आवाज से स्कूल परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। यदि बच्चे उस समय कमरे के अंदर मौजूद होते तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी

।घटना के बाद स्कूल भवन की जर्जर हालत को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि भवन की हालत लंबे समय से खराब है और समय रहते इसकी मरम्मत अथवा नए भवन का निर्माण नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।जर्जर भवन को तोड़कर नया भवन बनाने की मांग
ग्राम सोनपुर के सरपंच डॉ. संत राम कुंभकार ने बताया कि स्कूल के दोनों भवन काफी पुराने एवं जर्जर हो चुके हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जर्जर प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल भवनों को डिस्मेंटल कर उसी स्थान पर नए भवन का निर्माण कराया जाए। पुराने भवन का निर्माण सन 2005 में किया गया था
सरपंच के अनुसार, इस संबंध में प्रशासन के समक्ष मांग रखी जा चुके है, लेकिन अब तक नए भवन के निर्माण को लेकर आवश्यक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
उन्होंने कहा कि दोनों स्कूल के भवन में सीपेज आता है जिससे बच्चों को तकलीफ होती है
प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी पर उठे सवालग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन की जर्जर स्थिति कोई अचानक पैदा हुई समस्या नहीं है। भवन की हालत लंबे समय से खराब है और इसकी मरम्मत अथवा नए भवन की आवश्यकता को लेकर लगातार मांग की जाती रही है।
इसके बावजूद प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी के कारण नया भवन अब तक नहीं बन पाया।मंगलवार की घटना ने एक बार फिर स्कूलों के जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल मौके का निरीक्षण कर जर्जर भवन को असुरक्षित घोषित करे तथा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता ,,गांव के लोगों का कहना है कि स्कूल में छोटे-छोटे बच्चे पढ़ते हैं और उनकी सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। मंगलवार को बच्चों के प्रार्थना स्थल पर मौजूद होने के कारण बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यह घटना भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि सोनपुर के दोनों जर्जर स्कूल भवनों का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और यदि भवन उपयोग के योग्य नहीं हैं तो तत्काल डिस्मेंटल कर नए भवन के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिल सके।







