
नेशनल ब्यूरो, नई दिल्ली। पीएम मोदी के 18 अप्रैल को दिए गए राष्ट्र के नाम संबोधन पर सवाल उठे हैं। 700 से अधिक नागरिकों जिनमें पूर्व सिविल सेवक, शिक्षाविद्, कार्यकर्ता और पत्रकार शामिल हैं ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि यह संबोधन Model Code of Conduct का उल्लंघन है। उन्होंने जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने महिलाओं के आरक्षण लागू करने के सरकार के प्रयास की ‘भ्रूण हत्या’ की है, क्योंकि इन पार्टियों ने संवैधानिक संशोधन विधेयकों को पराजित कर दिया।यह संबोधन सरकारी प्लेटफॉर्म्स जैसे दूरदर्शन, संसद टीवी और आकाशवाणी पर प्रसारित किया गया था।
शिकायतकर्ताओं ने कहा कि यह MCC की अवधि के दौरान ‘चुनावी प्रचार और पक्षपाती प्रचार’ है। 20 अप्रैल को मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजे गए पत्र में शिकायतकर्ताओं ने MCC के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि मंत्रियों को सरकारी कार्यों को चुनावी प्रचार के साथ जोड़ने की अनुमति नहीं है और न ही सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल पक्षपाती उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
सरकार द्वारा वित्त पोषित मीडिया का इस्तेमाल करके सत्ताधारी पार्टी को ‘अनुचित लाभ’ मिला है, जिससे निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए जरूरी समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित हुआ है।
पत्र में चुनाव आयोग से अनुरोध किया गया है कि वह इस मुद्दे का संज्ञान ले, संबोधन की सामग्री और तरीके की जांच करे तथा उचित कार्रवाई करे। साथ ही, अगर पहले से प्रसारण की अनुमति दी गई थी, तो अन्य राजनीतिक दलों को भी सार्वजनिक प्रसारकों पर समान समय दिया जाए।हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल प्रमुख नाम नीचे हैं।
- पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल नजीब जंग
- राजनीतिक अर्थशास्त्री परकाला प्रभाकर
- कार्यकर्ता योगेंद्र यादव
- अर्थशास्त्री जयति घोष
- संगीतकार-लेखक टी.एम. कृष्णा
- पूर्व संघ सचिव ई.ए.एस. शर्मा
- कार्यकर्ता हर्ष मंदर
- पत्रकार परंजय गुहा ठाकुरता
- शिक्षाविद् जोया हसन
- पूर्व राजदूत मधु भदौड़ी
इनके अलावा पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, पूर्व सिविल सेवक आशीष जोशी, अमिताभ पांडे, अवय शुक्ला, पत्रकार जॉन डयाल और विद्या सुब्रमण्यम, सीपीआई नेता एनी राजा तथा कई शिक्षाविद्, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि चुनाव आयोग को अपने संवैधानिक दायित्व के तहत ‘चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता’ बनाए रखने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।


